भूराजस्व अभिलेखों में खुद को ज़िंदा कराने में 18 वर्ष तक लड़ाई लडे लालबिहारी को हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार, डीएम ने कहा भेज दिया गया डॉक्यूमेंट

भूराजस्व अभिलेखों में खुद को ज़िंदा कराने में 18 वर्ष तक लड़ाई लडे लालबिहारी को हाईकोर्ट के फैसले का इंतज़ार, डीएम ने कहा भेज दिया गया डॉक्यूमेंट
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आज़मगढ़ : भूराजस्व कर्मचारियों व अधिकारियों की कारगुजारियों की वजह से 1976 से 1994 तक दस्तावेजों में मृत माने गए आजमगढ़ के सदर तहसील अंतर्गत अमिलो में रहने वाले लाल बिहारी मृतक को कोर्ट में करीब 12 वर्ष की लड़ाई के बाद अपने साथ न्याय की उम्मीद है। हाईकोर्ट ने लालबिहारी के 25 करोड़ के मुआवज़े के वर्ष 2005 में किये गए दावे की सुनवाई में लखनऊ से आजमगढ़ के अधिकारियों से पूछा है कि लालबिहारी द्वारा झेली गयी विपत्तियों और संत्रास के लिए मुआवजा क्यों न मिले। वहीं मामले में डीएम चंद्रभूषण सिंह का कहना है कि हाईकोर्ट के डायरेक्शन के अनुसार कार्रवाई जो की गयी है और जो होनी है उसकी एफिडेविट भेजी गयी है और कुछ और डायरेक्शन के अनुसार 13 मार्च से पहले भेज दी जाएगी। आज़मगढ़ में मौजूद लालबिहारी के अनुसार फैसला 13 मार्च को आना है देखना होगा कि कोर्ट का क्या फैसला है। लालबिहारी के अनुसार उन्होंने अपने को ज़िंदा कराने के लिए हर प्रकार से लड़ाई लड़ी। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी व वीपी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा, कई चुनाव लड़ा, विधानसभा में कागज़ फेंके, अपने चचेरे भाई का अपहरण किया। उनका आरोप है कि अधिकारी भ्र्ष्टाचार के लिए मनमानी करते हैं और आम लोगों को इसी तरह परेशान करते हैं। पिछले साल ही उनकी भूमि को उनके भाई व उनके भाई की भूमि को लालबिहारी के नाम कर दिया। ज़िंदा होने के बाद लालबिहारी ने अपने जैसे कई पीड़ितों को कोर्ट व मानवाधिकार आयोग से ज़िंदा कराया हालांकि उनका मन्ना है कि आज भी लाखों की संख्या में ऐसे पीड़ित पूरे भारत वर्ष में हैं। बता दें कि लालबिहारी की अनोखी लड़ाई को लेकर मशहूर बॉलीवुड फ़िल्म प्रोडूसर सतीश कौशिक इसी वर्ष ज़िंदा के मृतक फिर मृतक के ज़िंदा होने को लेकर एक फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसकी लोकेशन को देखने कुछ दिन पूर्व ही आजमगढ़ आये थे। वहीं लालबिहारी के मामले में कोर्ट के गंभीर रुख को भांपते हुए शहर कोतवाली में करीब 42 वर्ष बाद 1974 के मामले में लालबिहारी को भूराजस्व अभिलेख में मृत दिखा कर अपने नाम वरासत कराने पर दो पट्टीदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज़ किया गया।

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