संत शिरोमणि रविदासजी की शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में धूमधाम से मनी जयंती, निकली झांकिया, स्कूलों में भी नमन

संत शिरोमणि रविदासजी की शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में धूमधाम से मनी जयंती, निकली झांकिया, स्कूलों में भी नमन
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आजमगढ़। जनपद में शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में संत रविदास जी की जयन्ती धूमधाम से निकाली गयी। जगह झांकिया निकाली गयीं व मन्दिर में पूजा किया गया। वहीं सरकारी व प्राइवेट स्कूलों में भी संत की जयंती पर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला गया। भारतीय जनता पार्टी नगर मण्डल द्वारा नगर अध्यक्ष विनय प्रकाश गुप्त की अध्यक्षता में नगर कार्यालय पर संत शिरोमणि रविदास जी की जयंती धूमधाम से मनायी गयी और संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत संत रविदास जी के चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किया गया। संचालन अवनीश चतुर्वेदी ने किया। नगर अध्यक्ष विनय प्रकाश गुप्त ने कहाकि संत रविदास का कहना था कि मनुष्य जन्म से महान नहीं होता है वह अपने कर्मों से महान होता है। संत रविदास जी ने भक्ति मार्ग से सम्पूर्ण समाज को जागृत करने का कार्य किया। किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य माधव कृष्ण त्रिपाठी ने कहाकि संत रविदास के विचारों को हमें अपने आचरण में उतारना चाहिए। उनके अनुसार सभी मनुष्य समान है। कोई कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता सभी को अपने कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से पूरा करना चाहिए। नगर प्रभारी डा दुर्गा प्रसाद अस्थाना ने कहाकि संत रविदास इतने बड़े संत होकर भी सदैव अपेन कार्य के प्रति समर्पित रहे। वह कहा करते थे कि मन चंगा तो कटौती में गंगा। सादा जीवन जीते हुए परम ब्रह्म के साक्षात दर्शन करते थे। इस अवसर पर हरैया मण्डल अध्यक्ष रवि रायए नगर महामंत्री मृगांक शेखर  सिन्हा, सुनील मिश्रा, चंडिका नन्दन सिंह, नरेन्द्र बहादुर सिंह, आशीष दूबे, विवेक निषाद, अमित सिंह, अवनीश चतुर्वेदी, योगेन्द्र यादव, अली हैदर, अरूण सिंह, दीपक, अजय भारती, ऋषिकेश शुक्ला, लालचंद सोनकर, पंकज मोदनवाल आदि लोग मौजूद रहे। शहर के सर्वोदय पब्लिक स्कूल, हरबंशपुर में संत रविदास जी की 641 वीं जयंती मनायी गयी। संस्था की उपनिदेशिका कंचन यादव, प्रधानाचार्य एसपी दास ने रविदासजी के चित्र पर पुष्प चढ़ा कर दीप प्रज्जवलित किया एवं माल्यापर्ण किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए बताया की संत रविदासजी 15वीं शताब्दी के एक महान संत, कवि एवं समाज सुधारक तथा भगवान के सच्चे अनुयायी थे और अपने जीवन काल में अनेकों तरह की समस्याएँ एवं विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी वह अपने पंथ से अडिग थे। इस अवसर पर छात्रों ने भी रवि दास जी के जीवन के बारे में अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर उप प्रधानाचार्य चित्रा सिंह, मुख्य सलाहकार आरआर यादव, समस्त अध्यापकगण एवं अन्य कर्मचारीगण उपस्थित थे। निजी स्कूल बदरका के प्रांगण में संत रविदस जी की जयंती धूमधाम से मनाया गया। सर्वप्रथम संत रविदास के चित्र पर फूलमाला चढ़ा कर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की गयी। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बच्चों को संत रविदास के आरंभिक जीवन, शिक्षा, वैवाहिक जीवन, मीरा बाई से उनका जुड़ाव और समाज के प्रति उनके कार्या को विस्तार से बताया। अंत में उनके द्वारा रचि वाणियों को उपस्थित सभी लोगों ने दोहराया। श्री प्रजापति ने बताया कि संत रविदास ने कुरीतियों के खिलाफ मुखर होकर सभी को छुआछूत जैसे समाज को विकृत करने वाले कैंसर से मुक्त करने का काम किया। ऐस संत में वर्षो में एक बाद प्रकट होते है। इस अवसर पर अरविन्द, कन्हैया, जावेद, रामजनम, संत विजय, प्रताप यादव, गुड्डू, चन्द्रमोहन, सुभाष मिश्र, उर्मिला, प्रीति, पूजा, अलीशा, रजनी आदि सहित आदि समस्त बच्चे मौजूद रहे। संत रविदास की जयंती चंडेश्वर स्थित श्री दुर्गा जी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राचार्या डॉ मधुबाला राय की अध्यक्षता में धूमधाम से मनायी गयी। शिक्षकों ने उनके चित्र पर पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। वरिष्ठ प्राध्यापिका श्रीमती दुर्गावती उपाध्याय ने केन्द्र व प्रदेश सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहाकि सभी संस्था इसका आयोजन कर संत के विचारों प्रति लोगों को जागरूक करें। इससे महापुरूषों के बारे में जहां संवादां का आदान-प्रदान होगा वहीं हमारी आने वाली पीढ़ी इनके इतिहास को भी जानेगें। महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ प्रवेश सिंह ने रविदास को कबीर के समकक्ष बताते हुए कहाकि फिरोज तुगलक काल में जन्म लेने वाले इस संत ने न सिर्फ सहित्य के क्षेत्र बल्कि दार्शनिक एवं समाज सुधार के क्षेत्र काफी काम किया। छूआ-छूत, जाति-पाति, ऊंच-नीच पर कबीर की तरह करारा प्रहार इन्होने साहित्य के माध्यम से किया। रविदास जी तत्कालीन मुगल शासक बाबर एवं हुमायूं को धर्म के विपरित जाकर पांव छूने को ही मजबूर नहीं किया बल्कि हिंसा न करने के लिए भी प्रेरित किया था। कहाकि समाज के बुरे विचारों का विरोध कोई विद्रोही साहित्यकार या कथाकार ही कर सकता है। प्रेम की दीवानी मीराबाई मेवाड़ के राजघराने की लाडली होने के बावजूद इन्हें अपना गुरू मान बैठी और उन्हें आधुनिक भगवान कहकर रविदास की आराधना भी किया। शिक्षक संघ के जिला महामंत्री डा इन्द्रजीत ने संत रविदास को भक्ति काल का पुरोधा बताते हुए उनके विचारों का उल्लेख किया। विश्वविद्यालय इकाई के संयुक्त मंत्री राजीव त्रिपाठी ने रविदास जी को युगद्रष्टा बताया। अंत में श्री दुर्गाजी मंदिर ट्रस्ट के व्यवस्थापक व महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा फूलचंद सिंह ने कहा कि संत की वाणी में ज्ञान रचा व बसा होता है। उसमे से संत रविदास के बारे में  बुरे से बुरा इंसान भी नतमस्तक होकर सुधरने का प्रयास करता है। कार्यक्रम का संचालन डा ईश्वर चन्द्र त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर डा अजीत प्रताप सिंह, डा वीरेन्द्र दुबे, डा विष्णु, डा मुकुल दत्त, डा आरके पांडेय, इंजी जितेन्द्र कुमार, डा रामाश्रय शर्मा सहित आदि शिक्षक व कर्मी मौजूद रहे।

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