बाढ़ के चलते पीड़ितों की हालत बदतर, बदरहुआ गेज के समीप रेगुलेटर में रिसाव ने उड़ाए महुला गढ़वल बाढ़ के दक्षिण भाग के ग्रामीणों के होश, शारदा खण्ड 32 नहर भी लबालब 

आजमगढ़ में घाघरा नदी के उफान के चलते सैकड़ों गांव इस समय पानी से डूबे हैं और यहां की लाखों की आबादी बुरी तरीके से प्रभावित है। प्रशासन भले ही सभी सुविधाओं को आंकड़ों के हिसाब से सही बताने में जुटा है वहीं स्थानीय स्तर पर लोगों को घोर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन के अनुसार सभी कुछ दुरुस्त नजर आ रहा है लेकिन अगर स्थानीय लोगों से बात करें तो हालात बद से बदतर है। आज की ताजा मामले की बात करें तो बदरहुआ गेज़ के पास सेमराडीह के पास रेगुलेटर में रिसाव के चलते महुला गढ़वल बांध के दक्षिण तरफ कई गांव प्रभावित हो रहे हैं। खेतों में पानी भर गया घरों के सामने पानी लग गया। 20 दिन पूर्व टेकनपुर के पास रिंग बांध टूटने से दर्जनों गांव बुरी तरीके से प्रभावित हुए थे और 5 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह बांध की मरम्मत की जा सकी थी। वही महुला बांध के उत्तरी छोर की बात करें तो यहां पर 10 किलोमीटर की रेंज में घाघरा पूरी तरीके से 236 गांव को अपने शिकंजे में ले चुकी है। प्रशासन के द्वारा मुहैया व्यवस्था ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही हैं। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर आ जा रहे हैं। 2 दिन पूर्व पैदल जाने के चक्कर में जहां अधेड़ की मौत हुई थी वहीं एक बच्ची के इलाज को लाते समय नाव पलटने से उसकी मौत हो गई थी। अन्य लोगों को किसी प्रकार बचाया गया था। इसके अलावा सांप काटने की घटनाओं ने लोगों को बेहाल किया है। अब तक 3 लोगों की मौत हो चुकी है। प्रशासन के अनुसार तीन ब्लाकों पर एंटी वेनम इंजेक्शन की व्यवस्था है लेकिन उन अस्पतालों तक पहुंचना भी बहुत बड़ी चुनौती बनी है। ग्रामीणों के अनुसार अगर प्रशासन आपात स्थिति के लिए एक स्टीमर व बंधेे पर कुछ एंबुलेंस की व्यवस्था कर दे तो स्थिति काबू में आ सकती है। जहां तक एनडीआरएफ का सवाल है उसके अधिकारी एक दिन निरीक्षण करने आए थे। उसके बाद नहीं दिखाई दिए। प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो कुल 236 गांव बाढ़ प्रभावित हैं, 63,686 जनसंख्या है। 12 ग्रामों के निवासियों को बाढ़ शरणालय पर लाया गया है। 65 बाढ़ शरणालय की स्थापना की गई, जिसमें 07 संचालित हैं। 10 बाढ़ चौकी संचालित है। 24 घंटे कंट्रोल रूम का नंबर जारी किया गया है। बाढ़ शरणालयों में 514 लोग रह रहे हैं एवं बाढ़ से 776 पशु प्रभावित हैं। कुल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रफल 7266.55 हेक्टेयर है, जिसमें कृषि योग्य भूमि 6920 हेक्टेयर, कटान का क्षेत्रफल 21.302 हेक्टेयर है। बाढ़ से पूर्णतया क्षतिग्रस्त 6 पक्के मकान, आंशिक क्षतिग्रस्त 2 पक्के मकान, 01 कच्चा मकान, क्षतिग्रस्त झोपड़ियों की संख्या 55 है। अब तक 340 नावें लगाई गई हैं, 01 एनडीआरएफ की टीम, 02 पीएससी की फ्लड बटालियन लगाई है, 10 मेडिकल टीमें लगी हैं। 10 पशु शिविर स्थापित हैं, 433.70 कुंतल भूसा वितरित किया है, खाद्यान्न पैकेट 12735 , लंच पैकेट 5766 व क्लोरिन टैबलेट 134329 एवं 11000 परिवारों में 55 हजार लीटर मिट्टी के तेल का वितरण किया गया है। घाघरा नदी में बाढ़ हर वर्ष आती है और इसी प्रकार से लोगों को भीषण आपदा का सामना करना पड़ता है। महीनों पहले से प्रशासन मौके पर निरीक्षण कर वह बैठकें कर सारी तैयारियों व बंधों की मरम्मत का इंतजाम करने का दावा करता है लेकिन जब आफत आती है तो सब कुछ फेल नजर आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *