डिस्टेंसिंग का पालन कर जलसाये ज़श्ने हिफ्जे़ कुरआन व शहीदे आज़म कान्फ्रेंस मनाया गया 

आज़मगढ़ ।  अहसनुल मसाजिद बरकाती सेन्टर निजा़माबाद के तत्वावधान में मरहूम हाजी हफीज अहमद के अहाते में कोविड 19 के तहत डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जलसये ज़श्ने हिफ्जे़ कुरआन व शहीदे आज़म कान्फ्रेंस मनाया गया। हाफिज सरफराज अहमद पेशईमाम जामा मस्जिद के सरपरस्ती में हो रहे जलसे  की सदारत हज़रत अल्लामा व मौलाना नईमुद्दीन अजीजी सरबराहे आला अलजामेअतुल अशरफिया मुबारकपुर ने किया तथा निज़ामत ( सन्चालन) कारी रियाज अहमद ने किया।  जलसे के खास मेहमान हजरत मौलाना नईमुद्दीन साहब ने अपने खेताब में लोगों को अपने बच्चों को दीन इसलाम सीखाने तथा नमाज़ की पाबन्दी की नसीहत दी । तथा कहा कि जो तहजीब मदरसों से मिलता है और जगहों पर नहीं मिलता ।आपलोग अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ -साथ दुनियावी तालीम भी दें। मदरसों में ही बच्चों को रहन सहन की तरबीयत मिलती है । मां बाप के हुकूक, पड़ोसी के हुकूक , रोजे नमाज़ की पाबन्दी के साथ-साथ अच्छी जिन्दगी गुरारने की तरबीयत मदरसों मे ही मिलती है इस लिये आप लोग मदरसों को कायम रख्खेंं । जलसे के आयोजक हाफिज सरफराज अहमद, सभासद गुफरान अहमद व इमरान अहमद को मुबारकबाद दिया तथा बरकाती सेंन्टर की तरक्की की तारीफ करते हुए और तरक्की की दुआ दी। सेन्टर की तरक्की के लिए हाफिज सरफराज अहमद के मेहनत का सिला बताया। हज़रत मौलाना बदरे आलम मिसबाही ने अपने खेताब में रोजे और नमाज़ की पाबन्दी पर जोर देते हुए कहा कि नमाज़ हुजूर स.अ.वसल्लम के आंखों की ठन्ठक है। इन्होंने सरकार गरीब नवाज ,हजरत गौसुल आज़म के मकाम को बताते हुए उनके बताये रास्ते पर चलने के लिये कहा। तथा बच्चों को इल्मेदीन सिखाने की सलाह दिया। उन्होंने कहा कि जब एक बच्चा हाफिजे कुरआन होता है तो अपने साथ अपने खानदान के लिये जन्नत में मकाम बना लेता है। हाफिज सरफराज अहमद के मेहनत का नतीजा है कि आज़ एक छोटे से बच्चे हाफिज मोहम्मद नाजिम के सर पर फरागत की पगडी़ बंध रही है। हमारी दुआ है कि हाफिज मोहम्मद नाजिम आगे चलकर दीन की खिदमत करेगा। जलसे के अन्त में हाफिज मोहम्मद नाजिम के सर पर आये हुए ओलमाये कराम के हाथों से सर पर साफा बांधकर व झुब्बा पहनाकर हसीन मंजर में सनद दे कर फारिग की पगडी़ बांधी गयी। इसके बाद आये हुए मेहमान व खानदान वालों ने हाफिज मोहम्मद नाजिम को फूल मालाओं से लाद दिया तथा जमकर खैरमकदम किया। जलसे के संयोजक हाफिज सरफराज अहमद ने जलसे की कामयाबी पर खुशी का इज़हार करते हुए आये हुए सभी मेहमानों ,ओलमाओं व सोयराओं का खैरमकदम करते हुए कहा।

पूरा हमारे दिल का अरमान हो गया।,

बच्चा हमारा हाफिजे कुरआन हो गया।,

आंखोंको चूम चूम के मां बाप ने कहा।,

जन्नत में मेरा जाने का सामान हो गया।,

अन्त में डिस्टेंस्टिन का पालन करते हुए सलातो सलाम के बाद जलसा समाप्त हुआ।

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