प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की जिला स्तरीय समिति की प्रथम बैठक,मछुआरों व मत्स्य पालकों की आय को दो गुनी करना व रोजगार सृजन समेत अन्य लक्ष्यों पर चर्चा 

आजमगढ़ : प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की जिला स्तरीय समिति की प्रथम बैठक जिलाधिकारी राजेश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई। भारत सरकार द्वारा मत्स्य विकास एवं मत्स्य उत्पादकता में वृद्धि हेतु 2020-21 से 2024-25 तक नवीन प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना प्रारम्भ की गयी है। इस योजना का उद्देश्य मात्स्यिकीय क्षमता का सतत उत्तरदायी, समावेशी और सामयिक तरीके से विदोहन करना, मात्स्यिकीय उत्पादन में विस्तारीकण, सघनतापूर्वक एवं विविधीकरण के माध्यम से वृद्धि करना एवं भूमि व जल का उपजाऊ उपयोग करना, मूल्य वधित श्रृंखला का आधुनिकीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं मत्स्य निकासी के बाद के प्रबन्धन व गुणवत्ता में सुधार करना, मछुआरों व मत्स्य पालकों की आय को दो गुनी करना व रोजगार सृजन करना, कृषि के सकल मूल्य वर्धित एवं निर्यात में मात्स्यिकीय गतिविधियों की हिस्सेदारी बढ़ाना, मछुआरों व मत्स्य पालकों को सामाजिक व आर्थिक जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना तथा मजबूत मत्स्य प्रबन्धन और नियामक ढ़ांचा तैयार करना है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना के तहत जनपद स्तर पर वार्षिक मात्स्यिकीय प्लान तैयार करना, पर्यवेक्षण करना, लाभार्थियों का अनुमोदन करना, योजना के तहत लाभार्थियों को बैंक लिंकेज प्रदान करना है। इस योजना में मछुआ, मत्स्य पालक, मत्स्य कार्यकर्ता एवं मत्स्य विक्रेता, मात्स्यिकीय क्षेत्र के स्वयं सहायता समूह, मात्स्यिकीय क्षेत्र की सहकारी समिमियाॅ, मात्स्यिकीय क्षेत्र की सहकारी संघ, उद्यमी, अनु0जाति/जनजाति/महिला एवं दिव्यांगजन लाभार्थी होंगे। इस योजना के तहत शत प्रतिशत भारत सरकार की हिस्सेदारी है, इसमें सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति/जनजाति एवं महिला लाभार्थियों को कुल योजना लागत का 60 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता अनुदान के रूप में उपलब्ध कराया जायेगा। जिलाधिकारी ने मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि इस योजना के तहत जिन लाभार्थियों द्वारा आवेदन किया गया है, उनको प्राथमिकता के आधार पर बैंक लिंकेज कराकर भारत सरकार की योजना का लाभ प्रदान करें। उन्होने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना से संबंधित उप योजनाओं के अन्तर्गत निजी भूमि पर तालाब निर्माण की इकाई लागत 07 लाख रू0, रियरिंग यूनिट तालाब निर्माण की इकाई लागत 07 लाख रू0, फ्रेश वाटर एक्वाकल्चर निवेश (आईएमसी/पंगेसियस) की इकाई लागत 04 लाख रू0, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) (8 टैंक) की इकाई लागत 50 लाख रू0, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) (6 टैंक) की इकाई लागत 25 लाख रू0, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) (1 टैंक) की इकाई लागत 7.50 लाख रू0, बायोफ्लाक पाण्ड निर्माण वृहद की इकाई लागत 14 लाख रू0, बायोफ्लाक लघु की इकाई लागत 7.50 लाख रू0, सायकिल बिद आइस बाक्स की इकाई लागत 0.10 लाख रू0, मोटर सायकिल बिद आइस बाक्स की इकाई लागत 0.75 लाख रू0, थ्री व्हीलर आटो बिद आइस बाक्स की इकाई लागत 03 लाख रू0, मीठे जल की मत्स्य बीज हैचरी निर्माण की इकाई लागत 15 लाख रू0, लाइव बेन्डिंग सेन्टर की इकाई लागत 20 लाख रू0, फिश कियोस्क निर्माण की इकाई लागत 10 लाख रू0, फिश फीड मिल निर्माण क्षमता 2 टन प्रतिदिन की इकाई लागत 30 लाख रू0 तथा फिश फीड मिल निर्माण क्षमता 20 टन प्रतिदिन की इकाई लागत 200 लाख रू0 है। इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी हरी शंकर, एसडीएम सदर/ज्वाइण्ट मजिस्ट्रेट (आईएएस) गौरव कुमार, पीडी अभिमन्यु सिंह, डीसी एनआरएलएम बीके मोहन, एलडीएम यूबीआई शंकर चन्द्र सामंत सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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