संविधान के अनुच्छेद 341 (3) से धार्मिक प्रतिबंध हटाने के संबंध में राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के लोगों ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा

आजमगढ़ : उलेमा काउंसिल के नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वतंत्र भारत की पहली कांग्रेस सरकार जिसका नेतृत्व पंडित जवाहरलाल नेहरु कर रहे थे उन्होंने समाज के विभिन्न दलित अति पिछड़े वर्गों के साथ भेदभाव करते हुए आरक्षण से संबंधित अनुच्छेद 341 में संशोधन कर धार्मिक प्रतिबंध लगा दिया और समाज के हर धर्म के संबंध में रखने वाले दलितों अति पिछड़ों को 1936 से मिल रहे आरक्षण को छीन लिया जो कि भारतीय संविधान के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ थी।भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं देता और राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल का भी यही मानना है कि आरक्षण धर्म के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक व सामाजिक व्यवस्था के आधार पर दिया जाना चाहिए।अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध को समाप्त करना देशहित और न्याय हित के अति आवश्यक है। अन्याय है और संप्रदायिकता पर आधारित है और इसे तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए। इस मांग को लेकर राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के जरिए मिशन 341 के तहत देशव्यापी आंदोलन चलाया जा रहा है। 10 अगस्त 1950 को पंडित नेहरू ने संप्रदायिकता पर आधारित इस अध्यादेश को जारी किया था इसलिए आज ही के दिन हम इसे ज्ञापन के माध्यम से सरकार से मांग करते हुए कहा कि अनुच्छेद 341 से धार्मिक प्रतिबंध हटा कर सबका विकास के साथ अपने वादों को पूरा करें।

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