
आजमगढ़। मंगलवार को आजमगढ़ जिला मुख्यालय पर एक ओर विभिन्न संगठनों और छात्रों का प्रदर्शन चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने भी अपने अधिकारों के कथित हनन का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। दीवानी बार एसोसिएशन के आह्वान पर अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट क्षेत्र में जुलूस निकालकर नारेबाजी की और हाल ही में आए न्यायिक आदेश के विरोध में न्यायिक कार्य से विरत रहे।
बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं ने उस न्यायिक व्यवस्था का विरोध किया, जिसके तहत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा पाने वाले या FIR दर्ज होने पर अधिवक्ताओं के विरुद्ध उनकी वकालत पर रोक या निलंबन संबंधी कार्रवाई का प्रावधान लागू किए जाने की बात कही गई है। अधिवक्ताओं का कहना था कि इस प्रकार की व्यवस्था उनके पेशेवर अधिकारों को प्रभावित करती है और इसे लेकर व्यापक विमर्श की आवश्यकता है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि किसी अधिवक्ता के दोषसिद्ध होने के बाद उसके विरुद्ध कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से बार काउंसिल के अनुशासनात्मक ढांचे के अंतर्गत आता है। उनका आरोप था कि प्रस्तावित व्यवस्था से अधिवक्ताओं के स्वतंत्र रूप से पेशा करने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
विरोध स्वरूप अधिवक्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में मार्च निकाला, नारेबाजी की और न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि इस संबंध में स्पष्ट और संतुलित व्यवस्था नहीं बनाई गई तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ताओं की गरिमा और स्वतंत्रता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी प्रकार का निर्णय लेते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों तथा अधिवक्ताओं के वैधानिक अधिकारों का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों से संबंधित प्रस्ताव पारित कर उच्च स्तर पर भेजने का निर्णय लिया तथा चेतावनी दी कि यदि उनकी आपत्तियों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
