


ग्रामीण न्यायालय के गठन के विरोध में दीवानी कचहरी के अधिवक्ता लगातार बारहवें दिन सोमवार को पूरे दिन न्यायिक कार्य से कार्य से विरत रहे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार एक घंटे तक उत्तरी गेट तथा पूर्वी गेट पर सड़क पर चक्का जाम किया। बताते चले कि ग्रामीण न्यायालयों के गठन के विरोध में दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता एक फरवरी से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस संबंध में गठित संघर्ष समिति संयोजक राजेंद्र प्रसाद सिंह ने सोमवार को संघ भवन में पत्र प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई वादकारियों के हित में लड़ी जा रही है। सुदूर अंचलों में ग्रामीण न्यायालय स्थापित होने से गरीब तथा कमजोर तबके को न्याय नहीं मिल पाएगा। अभी ग्रामीण न्यायालय में आधारभूत ढांचा भी ठीक से मौजूद नहीं है। हमारी प्रमुख मांग है कि ग्रामीण अदालत से न्यायिक अधिकारियों को वापस बुलाया जाए। दीवानी न्यायालय में पहले से ही अधिकारियों की संख्या कम है और मुकदमों की संख्या बहुत ज्यादा है। कई अदालत खाली हैं। न्यायिक विकेंद्रीकरण के नाम पर अधिवक्ताओं के एकता को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को न्यायिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाना है तो दीवानी न्यायालय में रिक्त अधिकारियों के सभी रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए। सरकार अगर यह चाहती ही है कि न्यायिक विकेंद्रीकरण किया जाना आवश्यक है तो देश के हर राज्य की राजधानी में सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ तथा प्रदेश में हर मंडल स्तर पर हाईकोर्ट की एक खंडपीठ का गठन किया जाए। ग्रामीण न्यायालय के विरोध में अध्यक्षता संगठन की तरफ से केंद्र सरकार तथा प्रदेश सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सोमवार को इस आंदोलन में कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन तथा सेंट्रल बार एसोसिएशन की पदाधिकारी ने भी भाग लिया तथा सड़क जाम में सहयोग किया। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित श्रीवास्तव मंत्री रामनारायण यादव टैक्स बार संगठन के अध्यक्ष अजय कुमार समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए।
सिविल कोर्ट संघ भवन में गठित संघर्ष समिति संयोजक ने प्रेस वार्ता
ग्रामीण न्यायालय के विरोध को लेकर अधिवक्ताओं का रखा पक्ष
न्यायिक विकेंद्रीकरण के नाम पर अधिवक्ताओं की एकता को तोड़ने के प्रयास का आरोप