






आजमगढ़ जिले के सिधारी थाना क्षेत्र के रेनबो हॉस्पिटल में बच्चा बदलने के मामले ने तूफ़ान खड़ा कर दिया है। परिजनों को जब बच्चे बदलने की आशंका हुई तो परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। यह हंगामा रात्रि 2 बजे तक चलता रहा। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे के पिता को उसका बच्चा वापस दिलाने की बात कहते हुए अपने पक्ष में किया। इस दौरान अस्पताल गेट के बाहर बड़ी संख्या में लोग जो पीड़ित के पक्ष में आए थे, ने जमकर हंगामा किया। हंगामा कर रहे लोगों ने अस्पताल के कर्मचारी आशुतोष पर पैसा लेकर बच्चों को बेचने का आरोप भी लगाया। इसके साथ ही फॉरेंसिक टीम से जांच करा कर जेल भेजने की धमकी भी दी थी। हालांकि गुरुवार को परिजनों को बच्चा मिलने के बाद संतुष्टि जताई और अस्पताल प्रबंधन पर विश्वास जताया। हालांकि सोशल मीडिया पर इस मामले ने तूफ़ान खड़ा कर दिया। लोग कहे डाल न काला था इसलिए हंगामा हुआ। अब लीपापोती हो रही।
यह था पूरा मामला
आजमगढ़ के पुरानी कोतवाली के रहने वाले कमलेश वर्मा 12 मई को अपने बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराए थे। पास में ही एक बच्ची का भी इलाज चल रहा था। बच्चे की मां जब अपने बच्चे को दूध पिलाने गई तो डायपर बदलने पर देखा कि बच्चा नहीं वह तो बच्ची है। इसके बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी और डॉक्यूमेंट से बदले हुए बच्चे की तलाश शुरू कर दी। जो की बाद में जिले के तरवा थाना क्षेत्र के रासेपुर बोंगरिया के कंचनपुर गांव चला गया था। इस पूरे मामले में रेनबो हॉस्पिटल की घनघोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कमलेश वर्मा के दोस्त बिजली का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन जिस तरह से मामले को रफा दफा करने का दबाव बना रहा है और जेल भेजने की धमकी दे रहा है। वह दुखद है। वही दोस्त बिजली का कहना है कि हमारा बच्चा स्वस्थ था हम दूसरे के बच्चे का इलाज का पैसा दे रहे थे। इसके साथ ही 520 रुपया इलाज के लिए प्रतिदिन लिया जा रहा था। जबकि आयुष्मान कार्ड लगा था। वही पिता कमलेश वर्मा भी अपनी गरीबी का हवाला देते हुए कह रहा है कि पाई पाई इकट्ठा करके बच्चे का इलाज कर रहा हूं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने मामला बिगड़ता देख बच्चे के पिता को अपने प्रभाव में ले लिया है। जब तक बच्चा नहीं मिला था। तब तक पिता बहुत परेशान था।
