
आजमगढ़। मुबारकपुर इंटर कॉलेज के निर्माणाधीन मुख्य द्वार का स्वरूप इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर गेट के फोटो और वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद इसके निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। वायरल हो रहे वीडियो में निर्माणाधीन मुख्य द्वार पर गुंबदनुमा संरचना दिखाई दे रही है। इसको लेकर कुछ लोगों ने इसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार की तर्ज पर बनाए जाने का आरोप लगाया है।
मामला सामने आने के बाद शिवसागर भारती महाराज मुबारकपुर पहुंचे और विद्यालय प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने निर्माणाधीन गेट पर बनाए जा रहे गुंबद को हटाने की बात कही। उनके मुताबिक विद्यालय प्रबंधन ने भी विवाद से बचने के लिए गुंबद को हटाने का आश्वासन दिया है और उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
किसके आदेश पर बन रहा था गेट, उठे सवाल
दैनिक भास्कर से बातचीत में शिवसागर भारती महाराज ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि मुबारकपुर इंटर कॉलेज का मुख्य द्वार अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार की तर्ज पर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सवाल यह नहीं है कि विद्यालय का गेट क्यों बनाया जा रहा है, बल्कि सवाल इसके स्वरूप और निर्माण की अनुमति को लेकर है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि गेट का ऐसा स्वरूप किसके आदेश अथवा अनुमति से तैयार कराया जा रहा था।
उनके मुताबिक मौके पर विद्यालय प्रबंधन से बातचीत हुई है। प्रबंधन ने निर्माणाधीन गेट से गुंबद हटाने का आश्वासन दिया है। ऐसे में अब यह भी सवाल उठ रहा है कि आखिर निर्माण शुरू करने से पहले इस स्वरूप को लेकर विद्यालय प्रबंधन ने किन स्तरों से अनुमति ली थी।
1958 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
मुबारकपुर इंटर कॉलेज एक सहायता प्राप्त विद्यालय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विद्यालय को वर्ष 1958 में जूनियर हाईस्कूल स्तर की मान्यता मिली थी। इसके बाद वर्ष 1964 में हाईस्कूल और वर्ष 1966 में इंटरमीडिएट की मान्यता प्राप्त हुई। विद्यालय कक्षा छह से 12वीं तक संचालित होता है और जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, आजमगढ़ से मान्यता प्राप्त है।
विद्यालय प्रबंधन की ओर से बताया गया है कि विद्यालय की जमीन और भवन प्रबंध समिति के अंतर्गत हैं। मुख्य द्वार का निर्माण अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार से प्रेरित होकर किए जाने की बात भी प्रबंधन की ओर से कही गई है।
करीब एक हजार छात्र करते हैं पढ़ाई
मुबारकपुर और आसपास के क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह विद्यालय लंबे समय से शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। विद्यालय में करीब एक हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत बताए जा रहे हैं। प्रबंधन के अनुसार इनमें लगभग 75 प्रतिशत मुस्लिम और 25 प्रतिशत हिंदू छात्र हैं। विद्यालय में करीब 15 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 12 मुस्लिम और तीन हिंदू शिक्षक बताए गए हैं।
प्रशासन ने साधी चुप्पी
मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने और विद्यालय के मुख्य द्वार को लेकर सवाल उठने के बावजूद जिला प्रशासन और जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से फिलहाल कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार किया है। ऐसे में सवाल यह भी है कि सहायता प्राप्त विद्यालय में निर्माणाधीन मुख्य द्वार के स्वरूप को लेकर शिक्षा विभाग की क्या भूमिका है और क्या इसके निर्माण की कोई औपचारिक अनुमति ली गई थी।
पहले भी सामने आ चुका है मजहबी शिक्षा का मामला
आजमगढ़ में शिक्षण संस्थानों से जुड़े इस तरह के विवाद का यह पहला मामला नहीं है। जनवरी 2026 में आजमगढ़ पब्लिक स्कूल में कथित तौर पर मजहबी शिक्षा दिए जाने का मामला सामने आया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था।
हालांकि आरोप सामने आने के करीब आठ महीने बाद भी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब मुबारकपुर इंटर कॉलेज के मुख्य द्वार का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में होने वाली गतिविधियों और उन पर शिक्षा विभाग की निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
फिलहाल निर्माणाधीन गेट से गुंबद हटाने के विद्यालय प्रबंधन के आश्वासन के बाद विवाद थमता नजर आ रहा है, लेकिन गेट के निर्माण की अनुमति, उसके स्वरूप और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना बाकी है।
