
आजमगढ़। शहर से सटे पठखौली गांव के ओंकारेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन शनिवार को अयोध्या से पधारे संत सर्वेश जी महाराज ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षा के लिए भगवान को भी गुरु की शरण में जाना पड़ता है।
बताया कि गुरु वशिष्ट के आश्रम में भगवान ने वेद पाठ, शास्त्र का अध्ययन किया और उसके बाद अयोध्या आने पर ऋषि विश्वामित्र के साथ जंगल में उनके यज्ञ की रक्षा करने के लिए जाते समय रास्ते में ताडक़ा का वध किया। आजमगढ़ के बहिरादेव में ही वह स्थान था जहां पर प्रभु श्री राम ने ताडक़ा वध किया और इसी रास्ते से होकर वह बक्सर तक विश्वामित्र की यज्ञ की रक्षा करने के लिए गए और यज्ञ संपन्न कराया। वहां से राजा जनक के आमंत्रण पर विश्वामित्र को लेकर के जनकपुर गए। संगीत के साथ राम कथा सुनकर सभी विभोर हो गए। कथा में गांव एवं क्षेत्र के कई गांव के श्रद्धालु अमृत कथा का रसपान देर रात तक कर रहे हैं। प्रतिदिन के यजमान विष्णु सहाय पाठक के अलावा आभा पाठक, रागिनी पाठक, वर्षा सिंह, सविता दुबे और प्रसाद यजमान अवधेश चौबे, सुमन पाठक पुत्री रामधनी पाठक, गौरी चरण उपाध्याय, शिव शंकर पाठक, जयंत पाठक व पत्नी प्रेमलता की ओर से सपरिवार भोग प्रसाद और आरती संपन्न कराई गई। आयोजन समिति के सदस्य शिव शंभू पाठक, प्रमोद कुमार पाठक, आशुतोष पाठक, बागेश्वर पांडेय, भोले, अजय मिश्रा, रिपुंजय वर्मा, देवेंद्र पाठक आदि ने व्यवस्था में सहयोग प्रदान किया।
