





ईरान पर हमले के बाद तेहरान में शिया समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु आयतुल्लाह खामनेई के शहीद होने का समाचार जैसे ही आजमगढ़ के तमाम क्षेत्रों में पहुंचा शिया समुदाय में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ गुस्सा भड़क गया। लोग गमजदा हो गए। आजमगढ़ शहर के आसिफ गंज स्थित डॉक्टर बनर्जी के सामने की गली में मदरसा में शोक संवेदना को लेकर मजलिस का आयोजन किया गया। वहीं मुबारकपुर नगर के दरबार ए हुसैनी शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में शिया समुदाय के लोगों ने अयातुल्लाह खामनेई की मौत को लेकर आक्रोश जताया। रविवार को दुकान बंद कर मुबारकपुर में लोग सड़क पर उतर आए और प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया। वहीं आजमगढ़ शहर में होली का पर्व होने के चलते लोगों ने मदरसे के अंदर ही मजलिस कर शोक जताया। इस दौरान लोगों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भारत सरकार से इन दोनों से संबंध खत्म करने की मांग की। लोगों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्यायूं को फांसी दिए जाने की भी मांग की। मदरसे के अंदर पूरे रास्ते में इजराइल और अमेरिका के नेता बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की फोटो पर चढ़कर लोग गए। वहीं आयतुल्लाह खामनेई की फोटो लोग हाथों में लिए नारे लगाते रहे। कुरान पढ़ कर श्रद्धांजलि देते हुए गम का इजहार किया। कहा कि खामनेई नेता नहीं थे बल्कि समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु थे। हम लोग पिता से भी बढ़कर उनको दर्जा देते थे। वह जालिम हुकूमत के खिलाफ थे। हजरत इमाम हुसैन के रास्ते पर चले। अमन का पैगाम दिया। कभी भी शैतानी ताकतों के सामने झुकने का काम नहीं किया। बहुत दबाव पड़ा। लेकिन एक इंच भी नहीं झुके और शहीद हो गए। आजमगढ़ में कार्यक्रम के दौरान सैयद मोहम्मद मेहंदी, मौलाना जमीरुल हसन, मौलाना सुल्तान, मौलाना गुलाम हैदर, मौलाना कल्बे हसन, सैयद आजाद हुसैन समेत अन्य लोग मौजूद रहे। सुनते हैं शिया समुदाय के मौलाना और संगठन के अध्यक्ष ने क्या जानकारी दी।
