ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती किसानों के मसीहा थे-केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला में पहुंचे डिप्टी सीएम

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आजमगढ़: ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा न्यास व महाराज सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय , यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्डर, नॉर्वे, स्वदेशी शोध संस्थान व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमर कंटक, रूहुना विश्वविद्यालय श्रीलंका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सह कार्यशाला का दो दिवसीय आयोजन हरिऔध कला भवन में किया गया।
जिसका विषय ‘’पूर्ण रोजगारयुक्त भारत के लिए शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका’’ थी, जिसकी अध्यक्षता अनन्त श्री विभूषित जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी अनंतानंद सरस्वती,राजगुरु मठ पीठाधीश्वर काशी ने किया |
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री डॉ सुनील डबास, अखिल भारतीय संगठक स्वदेशी जागरण मंच कश्मीरी लालजी,कुलपति बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रो.राज कुमार मित्तल ,कुलपति महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़ व आयोजक प्रो. सजीव कुमार , टेक्नोक्रेट और नीति निर्माता डॉ ओंकार राय उपस्थित रहे।

  कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों, स्वदेशी उपयोग और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की है और लोगों में राष्ट्रीय गर्व की भावना को बढ़ावा दिया है। पिछले कुछ वर्षों में गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, विश्वविद्यालयों की स्थापना और “एक जनपद — एक उत्पाद” जैसी योजनाओं से प्रदेश और देश की प्रगति में तेजी आई है। उन्होंने युवाओं को 2047 के लक्ष्य में भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सहजानंद राय की प्रशंसा करते हुए कहा की स्वामी जी के नाम से न्यास बनाकर इतना बड़ा कार्य कर उनकी सोच को जीवंत करने का सराहनीय कार्य किया है | 

ब्रह्मर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती सेवा न्यास के अध्यक्ष सहजानंद राय ने कहा कि ब्रम्हर्षि स्वामी सहजानंद सरस्वती जी संन्यास को समाज-सेवा से जोड़ा और जीवनभर किसानों, श्रमिकों और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।वे भारत में किसान आन्दोलन के जनक थे।वह कहते थे जब तक किसान शोषण से मुक्त नहीं होगा, देश सच्चे अर्थों में स्वतंत्र नहीं हो सकता।उन्होंने संन्यास को पलायन नहीं, बल्कि समाज-सेवा का माध्यम माना। स्वामी जी कहते थे कि सच्चा साधु वही है जो दुखी और शोषित के साथ खड़ा हो।ब्रिटिश शासन के विरुद्ध मुखर आवाज़ थे।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जब केंद्र और प्रदेश में आई है तब युवाओं के लिए रोज़गार मेले और नियुक्तियाँ अधिक आयोजित की जा रही हैं।स्टार्टअप्स और उद्यमिता को आर्थिक सहायता मिल रही है। कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार जारी है। अन्नदाता किसानों के लिए प्रधानमंत्री सम्मान निधि और किसको की आय कैसे दोगुना हो सके लगता इस पर कम कर रही है। नारीशक्ति और कैसे शसक्त और मजबूत हो सके इस पर भी बल दे रही है।
कार्यक्रम में जिले युवा उद्यमियों,अन्नदाता किसान,शिक्षकों,खिलाड़ियों, नारी शासक्तिकरण को मजबूत करने वाली महिलाओं और कलाकारों का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम का संचालन न्यास के सचिव अवनीश राय मानस,निवर्तमान जिला अध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव , प्रवीण सिंह, परितोष राय, डॉ प्रशांत राय, आशीष सिंह, मयंक श्रीवास्तव, ऋषभ सिंह, आनंद मिश्रा, अरविंद चित्रांश, आलोक, सौरभ सिंह श्रीनेत, अमन श्रीवास्तव आयोजन समिति सदस्य सहित सैकड़ो प्रबुद्ध लोग मौजूद रहे।

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