


आजमगढ़: जिला उद्यान विभाग की तरफ से नीलकंठ आलू की पैदावार को बढ़ाने के लिए ट्रायल के तौर पर किसानों में कुछ दिनों पहले इसका बीज वितरित हुआ। नीले रंग के छिलके वाला आलू कई प्रकार से किसानों को लाभ वाला हो सकता है। देश में अन्य हिस्सों में उगाई जाने वाली यह प्रचलित किस्म है, जिसे किसान इसकी अच्छी उपज और रोग-सहिष्णुता के कारण पसंद करते हैं। नीलकंठ आलू की मुख्य विशेषताओं में कंद मध्यम से बड़े आकार के, अंडाकार, छिलका हल्का भूरा साफ करने पर बैंगनी होता है। पकने की अवधि लगभग 90–110 दिन है। उपज अनुकूल हालात में 250–300 क्विंटल/हेक्टेयर है। रोग सहनशीलता: झुलसा (ब्लाइट) जैसे सामान्य रोगों के प्रति अपेक्षाकृत सहनशील है। इसका उपयोग सब्ज़ी, चिप्स, फ्राई—घरेलू व व्यावसायिक दोनों कामों में उपयुक्त है। गूगल पर सर्च पर बताया कि
“नीलकंठ आलू शुगर-फ्री है” — यह दावा वैज्ञानिक रूप से एकदम सही नहीं है। कुफरी नीलकंठ (Neelkanth आलू), जो भारत में ICAR-सेंटरल आलू अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित एक विशेष किस्म है, में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा अधिक होती है। आलू में प्राकृतिक रूप से कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) होता है, जो पचने पर शुगर (ग्लूकोज़) में बदलता है इसलिए कोई भी आलू (नीलकंठ सहित) शुगर-फ्री नहीं होता। ये आलू सिर्फ सामान्य आलू की तुलना में पोषक तत्वों में बेहतर हो सकते हैं, लेकिन उनमें चीनी नहीं बल्कि स्टार्च जैसे कार्बोहाइड्रेट होता है। पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता चंद्रदेव राम यादव करैली ने उद्यान विभाग के सौजन्य से मिले बीज से नीलकंठ आलू की पैदावार की। कहा कि सामान्य आलू से अच्छी पैदावार है। इसका फायदा आने वाले दिनों में परीक्षण के बाद ही मिलेगा। पूर्व मंत्री अपनी खेती के लिए जाने जाते हैं, करेला की खेती से उनका उपनाम भी करैली पड़ा। नीले आलू की पैदावार को लेकर जिला उद्यान अधिकारी ने कहा- एंटी ऑक्सीडेंट, फाइबर युक्त, पोटेशियम, मैग्नीशियम, अच्छी पैदावार समेत अन्य खूबियों के कारण बढ़ावा दे रहे हैं।
