






आजमगढ़। सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी के खिलाफ शुक्रवार को आजाद अधिकार सेना ने जोरदार आवाज उठाई। संगठन के जिलाध्यक्ष अशोक सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विरोध दर्ज कराया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा संचालित जनसुनवाई प्रणाली (IGRS/PG पोर्टल) और सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के क्रियान्वयन में कथित लापरवाही और मनमाने रवैये के खिलाफ जिलाधिकारी के माध्यम से भारत की राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में कहा गया कि एक ओर प्रशासनिक स्तर पर IGRS निस्तारण में बेहतर प्रदर्शन के दावे किए जाते हैं, वहीं जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। संगठन का आरोप है कि कई मामलों में अधिकारी बिना मौके पर जांच किए और बिना शिकायतकर्ता से संपर्क किए ही भ्रामक रिपोर्ट लगा देते हैं, जिन्हें उच्च अधिकारी बिना सत्यापन के स्वीकार कर लेते हैं।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि अक्सर जांच उसी अधिकारी को सौंप दी जाती है, जिसके खिलाफ शिकायत की गई होती है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने इसे आम नागरिकों के अधिकारों के साथ अन्याय बताया।
इसके साथ ही सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम की वर्तमान स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। संगठन के अनुसार, जनसशक्तीकरण के उद्देश्य से लागू किया गया यह कानून अब प्रभावहीन होता जा रहा है। आरोप लगाया गया कि सूचना आयोग भी कई मामलों में जन सूचना अधिकारियों के मनमाने रवैये पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रहा है, जिससे सही सूचना प्राप्त करना कठिन हो गया है।
आजाद अधिकार सेना ने राष्ट्रपति से मांग की कि:
जनसुनवाई प्रणाली (IGRS) को प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाए।
गलत रिपोर्ट लगाने वाले अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
RTI के तहत सूचना देने में देरी या गलत जानकारी देने वालों की जवाबदेही तय हो।
शिकायतों की जांच निष्पक्ष एजेंसियों से कराई जाए।
इस मौके पर नन्दसेन सिंह, सुनील चौधरी, सुजीत दूबे, संतोष पाण्डेय, बद्री सिंह, प्रदीप त्रिपाठी, सुदर्शन समेत अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
