
आजमगढ़। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नीतियों के विरोध में शुक्रवार को शहर में अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया गया। ‘देश बचाओ, भविष्य बनाओ’ के बैनर तले जुटे लोगों ने पहले बेजुबान जीवों को भोजन कराया और इसके बाद ‘यूजीसी गो-बैक’ के नारे लगाकर शिक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सेवा कार्य के साथ विरोध दर्ज कराने का यह तरीका लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा।
प्रदर्शन के दौरान आलोक सिंह ने कहा कि बेजुबान जीवों को भोजन कराने के माध्यम से समाज के सामने एक संदेश रखने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि एक आवाज पर सैकड़ों बेजुबान भोजन के लिए एकत्र हो जाते हैं, लेकिन शिक्षा और भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों पर समाज को अभी और जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने नागरिकों से शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और जवाबदेह बनाने के लिए अपनी आवाज उठाने की अपील की।
समाजसेवी डीएन सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त रखना केवल सरकार या किसी संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी इसमें भूमिका है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखना है। आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए समाज को एकजुट होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
मीना राय ने कहा कि सेवा और जनजागरूकता को जोड़कर विरोध दर्ज कराने का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े विषयों पर जागरूक रहने तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का आह्वान किया।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज और देश के भविष्य की बुनियाद है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े नीतिगत निर्णयों को लेकर नागरिकों को जागरूक और सजग रहना चाहिए। आयोजकों ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि समाज में शिक्षा और युवाओं के भविष्य को लेकर जागरूकता पैदा करना भी है।
प्रदर्शन में देवनाथ सिंह, आलोक सिंह, ओंकार पाठक, मीना राय, माधुरी त्रिपाठी, वर्षम सिंह, संतोष सिंह, युवराज सिंह, राहुल सिंह, अवनीश, गुलाब चौरसिया, अनूप सिंह और ओमशी बरनवाल समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
