
आजमगढ़। मेहनगर थाना क्षेत्र के गंजोर गांव में बकाया मजदूरी मांगने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। एक मिस्त्री ने ठेकेदार समेत दो लोगों पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने, गाली-गलौज और मारपीट करने का आरोप लगाया है। पीड़ित की शिकायत पर मेहनगर थाने में दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
नामजद आरोपियों में गंजोर निवासी त्रिभुवन सिंह पुत्र शंकर सिंह और मेहनगर थाने के उपनिरीक्षक लल्लन यादव शामिल हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(2), 352 और एससी-एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एफआईआर तीन सितंबर 2026 को शाम 5:44 बजे दर्ज हुई।
एफआईआर के मुताबिक, गंजोर निवासी सोचन पुत्र वारू मिस्त्री का काम करते हैं। आरोप है कि गांव के त्रिभुवन सिंह ने उनसे मिस्त्री का काम कराया था। करीब एक माह में काम पूरा होने के बाद कुल मजदूरी 69,975 रुपये बनी। इसमें से 33 हजार रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 36,975 रुपये बकाया रह गए।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि बकाया मजदूरी मांगने पर आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे और रकम का भुगतान नहीं किया। मजदूरी दिलाने के लिए उसने मेहनगर थाने के अलावा एसएसपी आजमगढ़, श्रमायुक्त आजमगढ़ समेत अन्य अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन उसके अनुसार कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने एससी-एसटी कोर्ट आजमगढ़ में प्रार्थना पत्र दिया।
रात में घर पहुंचने और जबरन थाने ले जाने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 9 जून 2024 की रात करीब दो बजे त्रिभुवन सिंह, मेहनगर थाने के उपनिरीक्षक लल्लन यादव के साथ उसके घर पहुंचे। आरोप है कि लल्लन यादव ने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गाली-गलौज की और उसके साथ मारपीट की। इसके बाद उसे जबरन थाने ले जाया गया और 107/116 की कार्रवाई में चालान कर दिया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय उसके घर में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी और वह अंतिम संस्कार की तैयारी में लगा था। उसने पुलिसकर्मी से शव के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने की बात कही, लेकिन आरोप है कि उसकी बात नहीं मानी गई और उसके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया।
एससी-एसटी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद मेहनगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है। विवेचना की जिम्मेदारी भूपेश कुमार पांडेय को सौंपी गई है।
