
आजमगढ़ : दिनांक 17 अक्टूबर 2026 को जी.डी. ग्लोबल स्कूल, करतालपुर बाईपास, आजमगढ़ में दशहरा उत्सव श्रद्धा, भक्ति, उल्लास एवं सांस्कृतिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यार्थियों ने माँ नवदुर्गा को समर्पित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। श्री हनुमान स्तुति गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उत्सव का मुख्य आकर्षण मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला का सजीव मंचन रहा। विद्यार्थियों ने अपने अभिनय एवं संवादों के माध्यम से सत्य, धर्म, त्याग और मर्यादा का संदेश दिया। रामलीला ने दर्शकों को बुराई पर अच्छाई की विजय के शाश्वत महत्त्व से परिचित कराया। कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण ‘गौ सेवा सहभागिता’ अभियान रहा, जिसके अंतर्गत विद्यालय के समस्त विद्यार्थियों ने निराश्रित गायों के लिए रोटी दान की। इस पहल के माध्यम से बच्चों में जीवों के प्रति करुणा, संवेदनशीलता और सेवा-भाव विकसित करने का प्रेरणादायी संदेश दिया गया। निदेशिका श्रीमती स्वाति अग्रवाल ने विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं रामलीला के प्रभावशाली मंचन की सराहना करते हुए कहा, “दशहरा हमें धर्म, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। भारतीय संस्कृति में माँ की सेवा को सर्वोपरि सेवा माना गया है। माँ के चरणों में ही सच्चे संस्कारों और आशीर्वाद का वास है। जो संतान श्रद्धा और समर्पण के साथ अपनी माँ की सेवा करती है, उससे देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ माता-पिता की सेवा, जरूरतमंदों की सहायता तथा जीवों के प्रति करुणा का भाव ही हमारी भक्ति को सार्थक बनाता है। प्रबंधक श्री गौरव अग्रवाल ने कहा, “विजयादशमी हमें स्मरण कराती है कि असत्य कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः विजय सत्य की ही होती है। बच्चों में सेवा, करुणा और सदाचार के संस्कार विकसित करना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है।” कार्यकारी निदेशक श्री श्रीश अग्रवाल ने कहा, “रावण के दस सिरों का दहन तभी सार्थक है, जब हम अपने भीतर के अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य विकारों का अंत करें। भगवान श्रीराम का जीवन हमें मर्यादा, कर्तव्य और धर्म के पथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।” प्रधानाचार्या श्रीमती दीपाली भुस्कुटे ने कहा, “दशहरा बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश है। हमारा प्रयास है कि विद्यार्थी भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने आचरण में उतारें तथा ज्ञान के साथ संवेदना, संस्कार और सेवा-भाव को भी अपने व्यक्तित्व का अभिन्न अंग बनाएँ।” समग्र रूप से दशहरा उत्सव धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर संगम सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि वास्तविक विजय दूसरों पर नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर प्राप्त की गई विजय है। इस अवसर पर विद्यालय के संयोजक श्री जी.के. त्रिपाठी सहित सभी शिक्षक-शिक्षिकाएँ उपस्थित रहे।
