
आजमगढ़। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 347-आजमगढ़ की मतदाता सूची में विकास यादव नाम 10 बार दर्ज होने के मामले में निर्वाचन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी की ओर से 15 अक्टूबर को प्रेस वार्ता के दौरान लगाए गए आरोपों की जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) को मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से तत्काल हटाने तथा उनकी सेवा समाप्त करने के संबंध में नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, तत्कालीन सदर एसडीएम समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश की ओर से 24 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ से कराई गई। जांच में सामने आया कि विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में हिंदी में ‘विकास यादव’ नाम 13 बार दर्ज था। इनमें दो प्रविष्टियों को पहले ही नियमानुसार हटाया जा चुका था, जबकि शेष 11 प्रविष्टियां आजमगढ़ के 11 अलग-अलग व्यक्तियों से संबंधित पाई गईं। वास्तविक विकास यादव को छोड़कर अन्य 10 व्यक्तियों के नाम और विवरण में सुधार के लिए फार्म-8 भरवाए गए हैं। समान नाम और वल्दियत वाला एक अन्य मतदाता गोरखपुर जिले के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित पाया गया, जो इन प्रविष्टियों से अलग है।
कंप्यूटर सहायक और पांच बीएलओ पर गिरेगी गाज
निर्वाचन विभाग ने मामले के लिए जिम्मेदार कंप्यूटर सहायक संजय कुमार प्रजापति और पांच बूथ लेवल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। इनमें गीता देवी प्रथम, गीता देवी द्वितीय, सुनीता देवी, शीला देवी और उमेश कुमार यादव शामिल हैं। चार बीएलओ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, जबकि उमेश कुमार यादव रोजगार सेवक हैं। इन सभी को मतदाता सूची के कार्य से तत्काल हटाने और सेवा समाप्ति के संबंध में नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
तत्कालीन सदर एसडीएम समेत तीन अधिकारियों को नोटिस
मामले में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं तत्कालीन सदर एसडीएम नरेंद्र गंगवार, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी डॉ. मोनिका अग्रवाल तथा तत्कालीन नायब तहसीलदार सदर माधवेंद्र प्रताप सिंह के विरुद्ध भी कार्रवाई की तैयारी है। इन अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के तहत कार्रवाई से पहले नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, मतदाता सूची तैयार करने में पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही और पर्यवेक्षण में शिथिलता बरतने के आरोप में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा दोनों सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने के लिए आरोप पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पूरे जिले की मतदाता सूचियों की होगी जांच
मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन विभाग ने आजमगढ़ जिले के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी इसी बिंदु पर गहन जांच कराने का निर्देश दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जांच आख्या प्रस्तुत करनी होगी।
इस कार्रवाई से मतदाता सूची तैयार करने में बरती गई लापरवाही और निगरानी की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। हालांकि, संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के विरुद्ध सेवा समाप्ति, विभागीय कार्रवाई अथवा अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई का अंतिम निर्णय नियमानुसार प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगा।
