अरुणाचल प्रदेश में युद्धाभ्यास में लैंड स्लाइड की चपेट में आकर शहीद नायब सूबेदार को गांव पहुंचने पर दी परंपरागत रूप से श्रद्धांजलि, नारों से गूंजा वातावरण

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आजमगढ़। 14 मई को अरुणाचल प्रदेश के टेंगा में सेना के नायब सूबेदार प्रेम शंकर यादव (40) की लैंडस्लाइड में घायल होने के बाद कोलकाता के कमांड हॉस्पिटल में 24 मई को निधन हो गया। शहीद का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके पैतृक गांव संग्रामपुर थाना दीदारगंज पहुंचा, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।
प्रेम शंकर यादव, भारतीय सेना की माउंटेन डिवीजन यूनिट में कार्यरत थे। सीमा पर युद्धाभ्यास के दौरान 14 मई को लैंडस्लाइड में घायल होने के बाद उन्हें गुवाहाटी के बेस हॉस्पिटल ले जाया गया। बेहतर इलाज के लिए 19 मई को कोलकाता शिफ्ट किया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
शहीद के पिता दल सिंगार यादव ने कहा, “मेरा बेटा प्रेम शंकर होनहार था। वह देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ। मुझे उस पर गर्व है।” प्रेम शंकर 2002 में सेना में भर्ती हुए थे और जबलपुर, ग्लेशियर व विदेशी मिशनों में सेवा दे चुके थे।
शहीद की पत्नी संगीता, बेटा आदित्य और बेटी अपर्णा के विलाप से पूरा गांव गमगीन हो गया। प्रेम शंकर चार भाइयों में सबसे बड़े थे। उनके भाई गिरजा शंकर यादव सीआईएसएफ में, जय शंकर यादव और प्रो. विजय शंकर यादव बिहार में प्रोफेसर हैं। उनकी मां कृष्णावती का पहले ही निधन हो चुका है।
शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए कांग्रेस नेता अवधेश सिंह, सपा नेता राम आसरे विश्वकर्मा, विधायक कमलाकांत राजभर, भाजपा नेता कृष्ण मुरारी विश्वकर्मा, पूर्व सांसद संगीता आजाद, पूर्व विधायक अरिमर्दन आजाद सहित कई गणमान्य लोग पहुंचे। तहसीलदार कमल कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी अनिल बर्मा ने भी पुष्प अर्पित किए।
करुइ बाजार से दुर्वासा धाम तक शहीद के पार्थिव शरीर पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। करुइ, कुशलगांव, दीदारगंज, पल्थी, भेड़िया, गद्दौ पुर, अम्बारी, फूलपुर और दुर्वासा में लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। दुर्वासा धाम पर सैनिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया, जहां शस्त्र सुरक्षा बलों ने सलामी दी।

पूरा क्षेत्र “प्रेम शंकर अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। शहीद की शौर्य गाथा और देशभक्ति को याद करते हुए ग्रामीणों ने उन्हें नम आंखों से विदाई दी। शहीद प्रेम शंकर यादव अमर रहें!

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