





आजमगढ़। चार दशक पहले हत्या से सम्बन्धित न्यायालय की पत्रावली के दीमक से क्षतिग्रस्त पाए जाने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह कार्रवाई माननीय उच्च न्यायालय तथा जनपद न्यायाधीश के आदेश के अनुपालन में की गई है। मिली जानकारी के अनुसार सत्र परीक्षण संख्या 313 वर्ष 1983, सरकार बनाम चन्द्रपाल राय व अन्य के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 323, 302 और 452 के तहत मुकदमा थाना कोपागंज (तत्कालीन जनपद आजमगढ़, वर्तमान जनपद मऊ) में दर्ज था। इस मामले का निर्णय 10 अप्रैल 1986 को तत्कालीन द्वितीय अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश, आजमगढ़ द्वारा किया गया था। निर्णय के बाद मई 1986 में पत्रावली को अभिलेखागार में जमा कर दिया गया था। बाद में इस मामले से संबंधित फौजदारी अपील संख्या 2301 वर्ष 1986, चन्द्रपाल राय व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य उच्च न्यायालय में लंबित है। उच्च न्यायालय के ई-मेल दिनांक 12 जनवरी 2018 के माध्यम से उक्त सत्र परीक्षण की पत्रावली मांगी गई थी, जिसे 7 मई 2018 को तत्कालीन सहायक अभिलेखपाल विजय प्रताप सिंह द्वारा चार नत्थियों के साथ उच्च न्यायालय भेज दिया गया था। हालांकि 12 जुलाई 2023 को उच्च न्यायालय की ओर से पत्र संख्या 40037 के माध्यम से सूचना दी गई कि भेजी गई पत्रावली के अधिकांश दस्तावेज दीमक द्वारा क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रकरण में संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जाए तथा उस समय पत्रावली के अभिरक्षक रहे अभिलेखागार के कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की भूमिका की गहन विवेचना कराई जाए। इसी क्रम में जनपद न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश संख्या 198/2026 दिनांक 9 मार्च 2026 के अनुपालन में अभिलेखपाल (सिविल) नीरज कुमार गुप्त द्वारा कोतवाली थाना आजमगढ़ में तहरीर दी गई। प्रभारी निरीक्षक के निर्देश पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
