






आजमगढ़। जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए आजमगढ़ पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह पर गैंगस्टर एक्ट के तहत शिकंजा कस दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत 110 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी करने वाले संगठित गिरोह के 17 सदस्यों पर उ0प्र0 गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार विवेचना के दौरान इस गिरोह के तार चीन, दुबई सहित अन्य देशों में बैठे हैंडलरों से जुड़े पाए गए। यह गिरोह फर्जी “PM KISAN YOJANA (.APK)” ऐप और इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए लोगों के मोबाइल हैक कर उनके बैंक खातों से धन की अवैध निकासी करता था।
फर्जी ऐप से खाते से उड़ाए लाखों रुपये
मामले का खुलासा तब हुआ जब 18 नवंबर 2025 को गंभीरपुर थाना क्षेत्र के बिन्द्रा बाजार निवासी करन गुप्ता के व्हाट्सएप पर APK लिंक भेजकर उसे इंस्टॉल कराया गया। इसके बाद उसके खाते से लगभग 7.77 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के बाद साइबर क्राइम थाना आजमगढ़ में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
17 आरोपी गिरफ्तार, लाखों की रकम फ्रीज
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पहले 2 आरोपियों को 30 नवंबर 2025 को और बाद में 15 आरोपियों को 8 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 26 मोबाइल फोन, 15 सिम कार्ड, 14 एटीएम कार्ड, 26,500 रुपये नकद, घटना में प्रयुक्त 2 कारें और भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। साथ ही अभियुक्तों के बैंक खातों में लगभग 17.50 लाख रुपये की रकम फ्रीज कराई गई।
गैंगस्टर एक्ट के तहत हुई कार्रवाई
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की संस्तुति पर 16 मार्च 2026 को जिलाधिकारी द्वारा गैंगचार्ट अनुमोदित किए जाने के बाद थाना साइबर क्राइम में धारा 3(1) उ0प्र0 गिरोह बंद अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।
देश के कई राज्यों में फैला था नेटवर्क
गिरोह के सदस्य झारखंड, दिल्ली, छत्तीसगढ़, बिहार सहित उत्तर प्रदेश के कई जिलों से जुड़े हैं। पुलिस के अनुसार यह एक संगठित साइबर गैंग है जो अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क बनाकर ठगी को अंजाम देता था।
पुलिस की अपील—APK फाइल से रहें सावधान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से प्राप्त APK फाइल या लिंक को डाउनलोड न करें। ऐसे लिंक मोबाइल को हैक कर बैंक खाते, OTP और निजी जानकारी चोरी कर सकते हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।
