






आजमगढ़। शहर कोतवाली क्षेत्र के जुनैदगंज स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान विवाद का मामला सामने आया है। जीयनपुर थाना क्षेत्र के कसड़ा आयमा निवासी राजू यादव ने अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ पर मारपीट तथा जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है।
पीड़ित के अनुसार, उनके भाई इन्द्रेश का हाथ ट्रैक्टर में बेल्ट चढ़ाते समय गंभीर रूप से घायल हो गया था। 27 अप्रैल की सुबह उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोप है कि करीब एक घंटे उपचार के बाद जब परिजनों ने इलाज से असंतुष्ट होकर मरीज को अन्य अस्पताल ले जाने की बात कही, तो इसी बात को लेकर डॉक्टर और स्टाफ से कहासुनी हो गई।
राजू यादव का कहना है कि विवाद बढ़ने पर अस्पताल कर्मियों ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग उन्हें पकड़कर अंदर ले जाते हुए नजर आ रहे हैं।
पीड़ित ने बलरामपुर पुलिस चौकी पर तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो और तहरीर के आधार पर जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों और अस्पताल प्रबंधन के बीच हुए विवाद के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी।अस्पताल के मैनेजर गरुड़ श्रीवास्तव ने प्रेस वार्ता में बताया कि 27 अप्रैल 2026 को सुबह लगभग 10:15 बजे इंद्रेश यादव (18 वर्ष) पुत्र रामसुंदर यादव निवासी कसाड़ा (चुनहवा), थाना कोतवाली जीयनपुर को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। युवक के हाथ की दो उंगलियां कट गई थीं और अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था।
मैनेजर के अनुसार, घायल युवक की हालत देखते हुए डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए खून का बहाव रोकने के लिए उपचार के दौरान टांके लगाए गए। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ मरीज की जान बचाना और बेहतर इलाज देना था।
गरुड़ श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने यह अस्पताल किसी व्यवसायिक लाभ के लिए नहीं बल्कि गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा के उद्देश्य से खोला है। उन्होंने कहा,
“मैंने यह अस्पताल इसलिए शुरू किया ताकि गरीब, असहाय और पीड़ित लोगों को कम खर्च में बेहतर इलाज मिल सके। हमारा उद्देश्य सेवा है, विवाद नहीं।”
उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान मरीज के अटेंडर ने कहा कि वह युवक को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाना चाहता है। इस पर अस्पताल की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई और कहा गया कि जहां बेहतर लगे वहां मरीज को ले जा सकते हैं। अस्पताल का जो वाजिब शुल्क है उसको जमा करके अपने मरीज को ले जा सकते हैं। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल का करीब 1700 रुपये शुल्क जमा किया, रसीद ली और मरीज को लेकर जाने लगे।
आरोप है कि जब अस्पताल मैनेजर अपनी गाड़ी में बैठने जा रहे थे, तभी मरीज के अटेंडर कई अन्य लोगों के साथ पहुंचे और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज करने लगे। मैनेजर का आरोप है कि उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई तथा महिला स्टाफ के साथ भी धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किया गया।
