






आजमगढ़। शासन स्तर से वेतन भुगतान पर रोक लगाए जाने के बावजूद 10 शिक्षकों को लाखों रुपये का भुगतान किए जाने के मामले में समाज कल्याण विभाग के दो अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद हड़कंप मच गया है। नगर कोतवाली पुलिस ने जिला समाज कल्याण अधिकारी और विभागीय पटल सहायक के खिलाफ धोखाधड़ी व सरकारी धन के दुरुपयोग से संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कराई गई जांच में करीब 51.46 लाख रुपये के अनियमित भुगतान की पुष्टि हुई है। आरोप है कि जिन सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां शासनादेश के विपरीत पाई गई थीं और जिनके वेतन पर शासन ने रोक लगा दी थी, उन्हें भी विभागीय स्तर पर भुगतान कर दिया गया।
बताया गया कि इस मामले की शिकायत अरुण कुमार सिंह ने बीते 20 फरवरी को प्रशासन से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि समाज कल्याण विभाग के कुछ अधिकारियों ने नियमों को नजरअंदाज कर सरकारी धन का गलत तरीके से भुगतान किया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। समिति में जिला विकास अधिकारी और मुख्य कोषाधिकारी को भी शामिल किया गया था।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता, विभागीय अधिकारियों और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जिन शिक्षकों की नियुक्तियों पर सवाल उठे थे, उनके वेतन भुगतान पर शासन स्तर से पहले ही रोक लग चुकी थी। इसके बावजूद विभाग की ओर से भुगतान कर दिया गया।
जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने के बाद कार्रवाई तेज हुई। इसके बाद डिप्टी डायरेक्टर समाज कल्याण की तहरीर पर नगर कोतवाली में जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश चौधरी और पटल सहायक सत्येंद्र बहादुर सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 61(2) और 316(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
सीओ सिटी शुभम तोदी ने बताया कि जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले में साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
