
आजमगढ़, 5 सितंबर। शनिवार को फूलपुर तहसील में जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार का प्रशासनिक और सहज दोनों अंदाज देखने को मिला। एक ओर उन्होंने तहसील फूलपुर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनकर अधिकारियों को उनके गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए, वहीं शिक्षक दिवस के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय भोरमऊ पहुंचकर बच्चों के बीच शिक्षक की भूमिका निभाई और उनकी शैक्षणिक क्षमता परखी।
तहसील फूलपुर में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे फरियादियों ने अपनी समस्याएं रखीं। कुल 45 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें तीन का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष 42 शिकायतों को संबंधित विभागीय अधिकारियों को सौंपते हुए निर्धारित समय-सीमा में प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का महज औपचारिक निस्तारण न किया जाए, बल्कि फरियादी की समस्या का वास्तविक और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। जिन मामलों में मौके पर जांच या संयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता हो, उनमें संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर तत्काल मौके पर भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फरियादियों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
डीएम ने गंभीर एवं त्वरित समाधान वाले मामलों में तत्काल कार्रवाई तथा अन्य शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई और निस्तारण की स्थिति से अनिवार्य रूप से अवगत कराने के निर्देश दिए।
इसके बाद शिक्षक दिवस के अवसर पर जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय भोरमऊ, फूलपुर का आकस्मिक निरीक्षण किया। यहां उनका अंदाज पूरी तरह बदला नजर आया। वह बच्चों के बीच पहुंचे और उनसे आत्मीय संवाद करते हुए किताबें पढ़वाईं तथा विषय से जुड़े सवाल पूछकर शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों की समझ को परखा।
विद्यालय की दीवारों पर लिखी कविताओं और कहानियों को भी बच्चों से पढ़वाया गया। डीएम ने उनसे कहानी और कविता से संबंधित सवाल पूछे और उनकी ज्ञान क्षमता का परीक्षण किया। बच्चों के बीच पहुंचकर उन्होंने उन्हें आत्मविश्वास के साथ पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
सौरमंडल ने भी खींचा डीएम का ध्यान। विद्यालय की दीवार पर बनाए गए सौरमंडल का निरीक्षण करते हुए उन्होंने बच्चों से विभिन्न ग्रहों और उपग्रहों के बारे में सवाल पूछे। बच्चों ने उत्साह के साथ जवाब दिए। इस दौरान जिलाधिकारी ने शिक्षक की भूमिका में बच्चों को सौरमंडल से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी दीं।
शिक्षक दिवस पर उन्होंने बच्चों को भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन और योगदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उनकी जयंती को प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। डीएम ने बच्चों को शिक्षकों के महत्व को समझाते हुए शिक्षा के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
निरीक्षण के दौरान बच्चे मध्यान्ह भोजन कर रहे थे। जिलाधिकारी ने उनके बीच जाकर भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और नियमितता की जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के रसोईघर का निरीक्षण कर तैयार भोजन की गुणवत्ता और भोजन तैयार करने व रखने की व्यवस्था देखी। उन्होंने विद्यालय परिसर और रसोईघर में साफ-सफाई बेहतर बनाए रखने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों को शासन द्वारा निर्धारित मेन्यू के अनुसार स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाए। विद्यालय में पेयजल, शौचालय, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं को भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उनकी रुचि, प्रतिभा और क्षमता के अनुसार सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। बच्चों को लगातार प्रोत्साहित किया जाए, ताकि वे अपनी प्रतिभा को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।
इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनसमस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है। एक ओर शिकायतों के निस्तारण की लगातार निगरानी की जाएगी, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत भी परखी जाएगी।
