मतदान से पहले विद्यालयों और शिक्षकों की जांच पर प्रत्याशी अजय सिंह ने उठाए सवाल, निर्वाचन आयोग से की कार्रवाई की मांग, गोरखपुर फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए 23 अक्टूबर को चुनाव

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आजमगढ़। शिक्षक MLC के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना है। मतदाता सूची से जुड़े मामलों में मतदान से ठीक पहले विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को अभिलेखों के साथ बुलाकर जांच किए जाने पर प्रत्याशी अजय सिंह ने आपत्ति जताई है। उन्होंने निर्वाचन आयोग को शिकायत पत्र भेजकर कथित मौखिक जांच पर रोक लगाने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायत में अजय सिंह ने कहा है कि मतदाता सूची से संबंधित निर्धारित प्रक्रियाओं और समय-सीमा पूरी होने के बाद इस तरह की जांच कराना उचित नहीं है। उनका दावा है कि प्रपत्र-7 भरने की अंतिम तिथि समाप्त हो चुकी है और मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन भी किया जा चुका है। ऐसे में मतदान से ठीक पहले विद्यालयों को अभिलेखों के साथ बुलाए जाने से शिक्षक मतदाताओं में भय और असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को बिना लिखित आदेश के बुलाया जाना निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इस मामले में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।
अजय सिंह ने निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेकर कथित मौखिक जांच पर रोक लगाने, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और स्वतंत्र, निष्पक्ष व भयमुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

राजनीतिक दलों से अलग रहकर शिक्षकों के हितों की लड़ाई लड़ूंगा: अजय सिंह

शिक्षक एमएलसी चुनाव को लेकर अजय सिंह ने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियां भी अपने प्रत्याशी मैदान में उतारती हैं, लेकिन शिक्षक एमएलसी का मुख्य दायित्व सरकार बनाने या मुख्यमंत्री चुनने के बजाय शिक्षकों के हितों की रक्षा करना है। शिक्षक एमएलसी को ऐसा प्रभावी माध्यम बनना चाहिए, जो शिक्षकों की समस्याओं को सरकार और विपक्ष के सामने मजबूती से उठाए और उनके समाधान के लिए दबाव बना सके।

अजय सिंह ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दल अपने हितों को ध्यान में रखकर प्रत्याशी उतारते हैं, जबकि शिक्षक एमएलसी का प्रतिनिधित्व शिक्षकों के हितों के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह हमेशा शिक्षकों की लड़ाई लड़ते रहे हैं और आगे भी उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़कर नहीं, बल्कि शिक्षकों के मुद्दों को केंद्र में रखकर काम करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 18 वर्षों से बनी परिस्थितियां शिक्षकों के हितों के विपरीत रही हैं। उनके मुताबिक, सरकार में स्थायी नौकरियों को समाप्त कर संविदा और संविदा आधारित रोजगार को आउटसोर्सिंग की ओर ले जाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे रोजगार की सुरक्षा प्रभावित होती है और कर्मचारियों के हितों की आवाज कमजोर पड़ती है।

अजय सिंह ने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों, स्थायी रोजगार और उनकी समस्याओं को लेकर वह लगातार आवाज उठाते रहेंगे। उनके अनुसार, शिक्षक एमएलसी का वास्तविक उद्देश्य राजनीतिक दलों के हितों के बजाय शिक्षकों के हितों का प्रतिनिधित्व करना होना चाहिए।

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