तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय रामायण महासम्मेलन में भारतीय ज्ञान-परंपराओं पर होगी चर्चा, रेखांकित होंगे रामायण के गूढ़ दर्शन संग भारतीय संस्कृति व सिद्धांतअतिथि होंगे भगवान श्रीराम, माता जानकी और श्रीमारुतिनंदन हनुमान

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आजमगढ़। लालगंज क्षेत्र के गोमती नगर स्थित जीडी मेमोरियल यांकर्स इंग्लिश स्कूल में 12 से 14 अप्रैल तक ज्ञान का महाकुंभ लगेगा, जिसमें डुबकी लगाकर जिज्ञासु अपनी जिज्ञासा भी शांत कर सकेंगे। प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान-परंपराओं पर चर्चा होगी, तो वहीं रामायण के गूढ़ दर्शन संग भारतीय संस्कृति व सिद्धांत को विद्वान रेखांकित करेंगे। श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रामायण महासम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए संयोजक डॉ. अपर्णा सिंह ने बताया कि इस वर्ष का मुख्य विषय भारतीय ज्ञान परंपराएं एवं सांस्कृतिक धरोहर-आधुनिक प्रबंधन के सिद्धांत, दर्शन और व्यवहार होंगे।
इस वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से अनेक विद्वान, शोधकर्ता, प्राध्यापक, लेखक, संस्कृतिकर्मी, रामायण मर्मज्ञ तथा प्रबंधन विशेषज्ञ को आमंत्रित किया गया है। सम्मेलन न केवल रामायण के गूढ़ दर्शन को उजागर करेगा, बल्कि भारतीय संस्कृति से जुड़ी आधुनिक प्रबंधन पद्धतियों, नेतृत्व सिद्धांतों, नैतिक मूल्यों, रामायण व श्रीराम के वैचारिक, वैज्ञानिक और वैधानिक पक्षों के अलावा शांति एवं समरसता की भावना को भी रेखांकित करेगा। खास बात यह कि कार्यक्रम के मुख्यअतिथि के रूप में भगवान श्रीराम, माता जानकी, विशिष्ट अतिथि यथा श्रीमारुतिनंदन पवनपुत्र हनुमान जी का आह्वïान किया जाएगा। उनके समक्ष दीप प्रज्जवलन और गणेश-सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा। उसके बाद शोधपत्र पढ़े जाएंगे और पैनल परिचर्चाएं होंगी।
महासम्मेलन के प्रमुख आकर्षणों में देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, सरकारी एवं निजी संगठनों से शोधार्थी और शैक्षणिक प्रतिनिधि मंडल जुड़ेगें, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वानों के व्याख्यान, विभिन्न भाषाओं और परंपराओं में रामायण की वैचारिक प्रस्तुतियां, शोध-पत्र प्रस्तुतियां, पैनल परिचर्चा और संवाद सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन, कीर्तन, कथावाचन एवं कला-प्रदर्शनी, रामायण के केंदीय विषय पर शोध आधारित स्मारिका और पुस्तक का विमोचन और विमर्श आदि होंगे।

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