






आजमगढ़। शासन की महत्वाकांक्षी फार्मर आईडी (फार्मर रजिस्ट्री) योजना में बड़ी लापरवाही और गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जिला प्रशासन की जांच में खुलासा हुआ है कि एक कर्मचारी द्वारा जानबूझकर दर्जनों किसानों को योजना के लाभ से वंचित करने का प्रयास किया गया। मामले में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, किसानों की फार्मर आईडी बनाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। इसके तहत जिला, विकास खंड और ग्राम स्तर तक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच कार्यों का स्पष्ट विभाजन भी किया गया था, ताकि कोई भी पात्र किसान योजना से छूट न जाए।
इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित कर्मचारी हरिहर यादव (गुप सी-70) द्वारा निर्देशों की अनदेखी करते हुए गांवों में जाकर किसानों से संपर्क नहीं किया गया और उनकी फार्मर आईडी नहीं बनाई गई। इतना ही नहीं, प्रशासन को गुमराह करने के लिए गलत सूचनाएं दी जाती रहीं, जैसे—लाभार्थी गांव से बाहर है, मोबाइल पर ओटीपी नहीं आ रहा या नाम मिसमैच है।
मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 9 अप्रैल 2026 को जिला प्रशासन द्वारा विशेष कैंप आयोजित कर अन्य विभागों के अधिकारियों से सत्यापन कराया गया। जांच में पाया गया कि 59 किसानों को पोर्टल पर गलत तरीके से “गांव से बाहर” दिखाया गया था, जबकि वे सभी गांव में ही मौजूद थे।
इस खुलासे के बाद यह साफ हो गया कि किसानों की फार्मर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित किया गया, जिससे वे सरकार द्वारा मिलने वाले वित्तीय लाभ से वंचित रह जाएं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित कर्मचारी पर विभागीय दायित्वों में घोर लापरवाही, अनियमितता और शासनादेश की अवहेलना के आरोप हैं। साथ ही यह भी सामने आया है कि उन्होंने विभागीय कार्य से विरत रहने की धमकी भी दी थी।
अब मामले में संबंधित कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की मांग की जा रही है। जिला प्रशासन पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है।
