संतों की महिमा अपार, यज्ञ से होता है वातावरण और मन का शुद्धिकरण, दुर्वासा धाम में सात दिवसीय हरिहरात्मक यज्ञ का भव्य समापन, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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आजमगढ़। पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व के केंद्र दुर्वासा धाम पर आयोजित सात दिवसीय हरिहरात्मक यज्ञ का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भव्य समापन हो गया। यज्ञ की पूर्णाहुति के उपरांत देर रात तक चले विशाल भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
ब्रह्मलीन सिद्ध संत दुर्वासा महामण्डलेश्वर मौनी बाबा के ध्वजवाहक श्री श्री 108 शुभम दास जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में पूरे सप्ताह क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। यज्ञ के समापन अवसर पर धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक ने संतों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि संत समाज मानवता को सही मार्ग दिखाने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि पर्यावरण और समाज के लिए भी अत्यंत लाभकारी होता है। यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा मन को शांति प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि संतों का दर्शन और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना अनेक यज्ञों के समान पुण्यदायी माना गया है। संतों के सान्निध्य से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और नैतिक मूल्यों का विकास होता है।
समापन समारोह एवं भंडारे में साहित्यकार पं. सुभाष चंद्र तिवारी ‘कुन्दन’, दैवज्ञ दुर्वासा मंडल के मुन्ना बाबा, जयराम उपाध्याय, राममिलन सिंह, लक्ष्मण दुबे, रासबिहारी सिंह, हाकिम बाबा, हरिद्वार सिंह, शिशिर दुबे, जनार्दन सिंह, आशुतोष सिंह, रामकवल तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति ने सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए ऐसे आयोजन समाज को एकजुट करने का कार्य करते हैं।

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