
आजमगढ़। जनपद के मुबारकपुर कस्बे के अलीनगर मोहल्ले में मंगलवार सुबह एक 86 वर्षीय बुजुर्ग के शव को दफनाने को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए। जमीन को लेकर हुए विवाद के कारण शव घंटों दफन नहीं हो सका। सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अभिलेखों के आधार पर जमीन की स्थिति स्पष्ट करने में जुट गई। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अड़े रहे, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
जानकारी के अनुसार, अलीनगर मोहल्ला निवासी 86 वर्षीय मोहम्मद शमीम का निधन हो गया था। परिवार के लोग जनाजे के बाद उनके शव को घर के समीप स्थित पुश्तैनी कब्रिस्तान में दफनाने की तैयारी कर रहे थे। जैसे ही शव दफनाने के लिए मौके पर पहुंचा, पश्चिम दिशा में स्थित ईदगाह कमेटी के सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए दफनाने से रोक दिया। उनका कहना था कि संबंधित भूमि कब्रिस्तान नहीं, बल्कि ईदगाह की जमीन है और वहां किसी को दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वहीं मृतक के पुत्र मोहम्मद शोएब और अन्य परिजनों ने ईदगाह कमेटी के दावे का विरोध किया। उनका कहना था कि यह स्थान उनके परिवार का पुश्तैनी कब्रिस्तान है और वर्षों से परिवार के लोगों को इसी जगह दफनाया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में उनकी दादी के निधन के बाद भी इसी स्थान पर उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ऐसे में अब दफनाने से रोकना पूरी तरह अनुचित है।
विवाद की सूचना मिलते ही मुबारकपुर थाना प्रभारी शशिचंद्र चौधरी, इंस्पेक्टर कमला सिंह यादव सहित भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रण में रखा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। नायब तहसीलदार वीरेंद्र कुमार, लेखपाल और कानूनगो ने मौके का निरीक्षण किया तथा उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति का परीक्षण शुरू किया। काफी देर तक अधिकारी दस्तावेजों की जांच करते रहे, जबकि दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और तर्क अधिकारियों के सामने रखते रहे। राजस्व विभाग का कहना था कि जमीन इल्ले इलाही वक्फ के नाम है। ईदगाह कमेटी के लोग वक्फ पर दावा ठोक रहे थे। जबकि परिवार पुश्तैनी कब्र होने का दावा करता रहा। नायब तहसीलदार ने कहा कि वह न तो दफनाने की अनुमति देंगे न ही दफनाने को कहेंगे।
घंटों तक चले इस विवाद के दौरान कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं था। एक ओर ईदगाह कमेटी संबंधित भूमि को ईदगाह की संपत्ति बताते हुए वहां दफनाने का विरोध करती रही, तो दूसरी ओर मृतक के परिजन इसे पुश्तैनी कब्रिस्तान बताते हुए उसी स्थान पर दफनाने की मांग पर अड़े रहे।
फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। राजस्व अभिलेखों की जांच और प्रशासन के निर्णय के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
