नौकरी लगवाने के नाम पर 2.39 लाख रुपये की ठगी, फर्जी नियुक्ति पत्र देकर आरोपी फरार

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आजमगढ़। नौकरी लगवाने का झांसा देकर एक युवक से 2.39 लाख रुपये ऐंठने और बाद में फर्जी नियुक्ति पत्र थमा देने का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सारायमीर थाना क्षेत्र के कौड़ा-ललिगई गांव निवासी धर्मराज भारती ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया कि वह रोजगार की तलाश में था। इसी दौरान उसे जानकारी हुई कि कोतवाली क्षेत्र के दलिसागर निवासी विनय कुमार यादव लोगों को रुपये लेकर अधिकारियों से संपर्क के माध्यम से नौकरी लगवाते हैं। इस पर धर्मराज अपने पिता फूलचंद को लेकर विनय यादव के घर पहुंचा और नौकरी लगवाने के संबंध में बातचीत की।
आरोप है कि विनय यादव ने नौकरी लगवाने का भरोसा देते हुए रुपये की मांग की। पीड़ित के अनुसार, उसने आरोपी को अलग-अलग तारीखों में फोन के माध्यम से कुल 2.39 लाख रुपये दिए। इसमें 25 जून को 50 हजार और 45 हजार रुपये, 10 जुलाई को 60 हजार रुपये, 17 जुलाई को पांच हजार और 45 हजार रुपये, 23 जुलाई को 20 हजार तथा 10 सितंबर को पांच हजार रुपये शामिल हैं। आरोपी ने शेष 61 हजार रुपये नौकरी लगने के बाद देने की बात कही।
पीड़ित के अनुसार, कुछ दिनों बाद विनय यादव ने उसे जेबीआईटी टेकनेट मैनेजमेंट एंड मल्टीसर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से एक नियुक्ति पत्र दिया और लखनऊ ले जाकर ज्वाइन करने को कहा। जब धर्मराज ने नियुक्ति पत्र के आधार पर नौकरी ज्वाइन करने का प्रयास किया तो उसे पता चला कि पत्र फर्जी है। इसके बाद उसे अपने साथ ठगी होने का एहसास हुआ।
आरोप है कि इसके बाद पीड़ित कई बार विनय यादव के घर रुपये वापस मांगने पहुंचा, लेकिन वह घर पर नहीं मिला और उसका फोन भी बंद मिला। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि 25 मार्च 2026 को वह अपने पिता के साथ आरोपी के घर पहुंचा और फर्जी तरीके से रुपये लेने तथा नौकरी नहीं लगवाने के बाद रकम वापस करने की बात कही। आरोप है कि इस पर विनय यादव आगबबूला हो गया और जातिसूचक गालियां देते हुए धमकी दी। पीड़ित के अनुसार, आरोपी ने रुपये वापस करने से इनकार करते हुए जान से मारने की धमकी भी दी।
धर्मराज का आरोप है कि मामले में पहले उसने कोतवाली पुलिस को शिकायत दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने 14 मई 2026 को पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ को रजिस्ट्री के माध्यम से प्रार्थना पत्र दिया। शिकायत के बाद स्थानीय स्तर पर समझौते की बात हुई और आरोपी ने हर माह 15 तारीख को 25 हजार रुपये वापस करने का आश्वासन दिया। पीड़ित के मुताबिक, 19 मई को आरोपी ने केवल 25 हजार रुपये ऑनलाइन भेजे, लेकिन इसके बाद शेष रकम वापस नहीं की गई।
मामले में न्यायालय के आदेश के बाद कोतवाली पुलिस ने 11 सितंबर 2026 को विनय कुमार यादव निवासी दलिसागर, थाना कोतवाली, आजमगढ़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 352 और 351(3) के साथ एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने मामले की विवेचना उपनिरीक्षक शुभम टोड़ी को सौंपी है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान आरोपों और लेनदेन से संबंधित तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।

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