
कप्तानगंज (आजमगढ़)। थाना क्षेत्र के बछुवापार गांव में पोखरे की जमीन पर एक व्यक्ति का शव दफनाए जाने को लेकर विवाद सामने आया है। ग्रामीणों के एक पक्ष ने इसे ग्राम पंचायत की भूमि बताते हुए शव दफनाने पर आपत्ति जताई है। वहीं मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि शव दफनाने से पहले ग्राम प्रधान से बातचीत की गई थी और उनकी मौजूदगी में ही शव को दफनाया गया। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
गांव निवासी राधेश्याम यादव ने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर शव दफनाया गया है, वह ग्राम पंचायत की जमीन है। उनका कहना है कि इस स्थान पर गांव के लोग जितिया और छठ जैसे पर्व भी मनाते हैं। ऐसे में वहां शव दफनाए जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
दूसरी ओर मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से बछुवापार गांव में रह रहे हैं और गांव के निवासी हैं। उनका कहना है कि पहले उनके परिवार के लोगों के शव दूसरे गांव स्थित कब्रिस्तान में दफनाए जाते थे। गांव में लंबे समय से रहने के बावजूद उनके लिए अलग कब्रिस्तान की व्यवस्था नहीं हो सकी है। समुदाय के लोगों के अनुसार, शव दफनाने से पहले ग्राम प्रधान से बातचीत की गई थी और उनकी मौजूदगी में शव को दफनाया गया।
गांव निवासी हरदेव यादव ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग गांव के निवासी हैं, लेकिन उनके लिए अब तक कब्रिस्तान की अलग भूमि उपलब्ध नहीं हो सकी है। उन्होंने मांग की कि जिस स्थान पर शव दफनाया गया है, उसे छोड़कर यदि गांव में कोई बंजर या अन्य उपयुक्त भूमि उपलब्ध हो तो उसे कब्रिस्तान के लिए उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद की स्थिति न बने।
फिलहाल मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। जमीन की वास्तविक स्थिति, उसके स्वामित्व और शव दफनाने की अनुमति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। समाचार लिखे जाने तक मामले में पुलिस को कोई तहरीर दिए जाने की जानकारी नहीं थी।
Reporter Vijay Kumar
