
आजमगढ़। बंद मकानों की रेकी कर उन्हें निशाना बनाने वाले अंतरजनपदीय शातिर चोरों के गिरोह का पवई पुलिस, स्वाट और सर्विलांस टीम ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से करीब 5.50 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण, 14 हजार रुपये नकद, तमंचा-कारतूस, एक टैम्पो और दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद आजमगढ़ के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुई चोरी की चार घटनाओं का खुलासा हुआ है।
पुलिस के अनुसार, 12 सितंबर को पवई थाना क्षेत्र के नाटी गांव निवासी उमाशंकर अपनी पत्नी के साथ एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में शामिल होने गए थे, जबकि उनके बच्चे स्कूल गए थे। इसी दौरान चोरों ने सुनसान घर को निशाना बनाया। घर का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुए बदमाशों ने बक्से का ताला तोड़ा और उसमें रखे सोने-चांदी के जेवर, करीब 10 हजार रुपये नकद तथा जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात लेकर फरार हो गए। मामले में पवई थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
घटना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार ने चोरी के खुलासे के लिए तीन पुलिस टीमों का गठन किया। इसके बाद पवई पुलिस के साथ स्वाट और सर्विलांस टीम ने संदिग्धों की तलाश शुरू की।
18 सितंबर की सुबह करीब पांच बजे पुलिस टीमों को मुखबिर से सूचना मिली कि संदिग्ध बदमाश अंबारी रोड की ओर बाघबहरा पुलिया के पास से गुजरने वाले हैं। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर दी। कुछ ही देर में हरे रंग के टैम्पो और दो मोटरसाइकिलों पर सवार चार संदिग्ध पुलिस के घेरे में आ गए। तलाशी और पूछताछ के बाद चारों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मो. अब्दुल्ला पुत्र स्व. मो. इकबाल निवासी सठियांव, थाना मुबारकपुर, अम्बेश कुमार पुत्र स्व. खरपत्तु निवासी कुकुड़ीपुर सठियांव, आकाश कुमार पुत्र वीरेन्द्र कुमार निवासी गजाड़ा सठियांव और विकास सोनी पुत्र रामकुमार सोनी निवासी सरायमीर के रूप में हुई है।
तलाशी के दौरान पुलिस को 14 सोने के आभूषण, 22 चांदी के आभूषण और 14 हजार रुपये नकद मिले। इसके अलावा मो. अब्दुल्ला के पास से .315 बोर का तमंचा और जिंदा कारतूस बरामद हुआ। चोरी में इस्तेमाल किया जा रहा हरे रंग का टैम्पो और दो मोटरसाइकिलें भी पुलिस ने कब्जे में ले लीं।
बंद मकान दिखते ही बनाते थे निशाना
पूछताछ में पुलिस के अनुसार आरोपियों ने बताया कि उनका तरीका बेहद सीधा था। गिरोह के सदस्य पहले ऐसे मकानों की रेकी करते थे, जिनके मालिक या परिजन बाहर गए हों अथवा मकान लंबे समय से बंद हो। मौका मिलते ही ताला तोड़कर घर में घुसते और सोने-चांदी के जेवर तथा नकदी समेटकर फरार हो जाते थे।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने आजमगढ़ में अलग-अलग तारीखों पर चार चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। इनमें कोतवाली आजमगढ़ के आराजीबाग ब्रह्मस्थान में 24 जुलाई को हुई चोरी, रौनापार के सुदनीपुर में चार अगस्त की चोरी, अहरौला के पकड़ी गांव में 26 अगस्त की चोरी और पवई के नाटी गांव में 12 सितंबर की चोरी शामिल है।
चोरी का माल बेचने की थी तैयारी
पुलिस के अनुसार आरोपी चोरी किए गए जेवर और अन्य सामान को अंबेडकरनगर जिले में बेचने की तैयारी में थे। गिरफ्तारी के समय भी वे कथित तौर पर रेकी के उद्देश्य से इलाके में घूम रहे थे। पुलिस के मुताबिक विकास सोनी पहले चोरी का माल खरीदता था, लेकिन बाद में वह भी गिरोह के साथ चोरी की घटनाओं में शामिल होने लगा।
चारों आरोपियों के खिलाफ पवई, रौनापार, अहरौला और कोतवाली आजमगढ़ थानों में संबंधित मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं अब्दुल्ला के खिलाफ पवई थाने में आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
अब्दुल्ला पर मुकदमों की लंबी फेहरिस्त
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी मो. अब्दुल्ला का आपराधिक इतिहास लंबा है। उसके खिलाफ आजमगढ़ और मऊ के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, गैंगस्टर एक्ट, आर्म्स एक्ट और अन्य धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ वर्ष 2014 से लगातार अलग-अलग मामले दर्ज होने का उल्लेख है।
अम्बेश कुमार के खिलाफ भी आजमगढ़ और मऊ में चोरी, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज और आईटी एक्ट समेत कई मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। आकाश कुमार के खिलाफ भी चोरी के मामले दर्ज हैं, जबकि विकास सोनी के खिलाफ पवई थाने में चोरी का मुकदमा दर्ज है।
पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। बरामद चोरी के जेवरों को संबंधित मुकदमों से जोड़कर पुलिस आगे की जांच कर रही है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में पवई थानाध्यक्ष मनीष पाल, उपनिरीक्षक नीतीश सिंह, शिव कुमार यादव समेत पवई थाना पुलिस, स्वाट टीम प्रभारी उपनिरीक्षक मो. शाबान की टीम तथा सर्विलांस प्रभारी उपनिरीक्षक सुनील तिवारी की टीम शामिल रही।
