
आजमगढ़। तरवां थाना पुलिस ने 17 वर्षों से फरार चल रहे ₹25 हजार के इनामी वांछित अभियुक्त मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से .315 बोर का देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस बरामद किया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा पुत्र स्वर्गीय श्याम नारायण मिश्रा उर्फ सामू मिश्रा, निवासी ग्राम तरवां सरैया, थाना तरवां, वर्ष 2010 से लगातार फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ डॉ. अनिल कुमार ने 27 नवंबर 2022 को ₹25 हजार का इनाम घोषित किया था।
मामला वर्ष 2009 से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, 16 मार्च 2009 को तरवां थाने में एक व्यक्ति ने अपनी पुत्री को मोनू मिश्रा द्वारा बहला-फुसलाकर भगा ले जाने की शिकायत की थी। इस पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद 30 मार्च 2009 को वादी की दूसरी पुत्री को भी भगाकर ले जाने के आरोप में एक और मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें मोनू मिश्रा का नाम सामने आया। इस मुकदमे में अपहरण, बहला-फुसलाकर ले जाने, साजिश और दुष्कर्म जैसी धाराएं लगाई गई थीं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी लगातार अपना स्थान और नाम बदलकर रह रहा था। उसकी तलाश में लगातार दबिश और अन्य प्रयास किए जाते रहे, लेकिन वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया। वर्ष 2010 में उसके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
बुधवार को तरवां पुलिस क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग के साथ वांछित एवं वारंटी अभियुक्तों की तलाश कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सुबह करीब पांच बजे ग्राम डुभाव स्थित नवरसिया पुलिया के पास घेराबंदी कर मोनू मिश्रा उर्फ बृजेश मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से .315 बोर का देशी तमंचा और एक जिंदा कारतूस मिला।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह वर्ष 2010 से गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना नाम और ठिकाना बदलकर रह रहा था। काफी समय बीत जाने के बाद उसे लगा कि पुलिस अब उसकी तलाश नहीं कर रही होगी। इसी वजह से वह अपने परिचितों से मिलने और मुकदमों के संबंध में राय-मशविरा करने के लिए वापस आया था, जहां पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ वर्ष 2026 में आर्म्स एक्ट के तहत नया मुकदमा दर्ज किया है। उसके आपराधिक इतिहास में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, हत्या के प्रयास, अपहरण, दुष्कर्म और गैंगस्टर एक्ट समेत कुल पांच मुकदमे दर्ज बताए गए हैं।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में तरवां थानाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक अजय कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अतुल कुमार मिश्रा और कांस्टेबल कमलेश कुमार यादव शामिल रहे।
