
आजमगढ़ – प्रधानमंत्री ने आज मन की बात कार्यक्रम में चर्चा के दौरान कहा कि कुछ लोग समाज की सामूहिक प्रयासों की शक्ति से रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं, ऐसा ही एक प्रयास उत्तर प्रदेश के जनपद आजमगढ़ में सामने आया है। आजमगढ़ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि तमसा केवल एक नदी ही नही है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सजीव धारा है। उन्होने कहा कि अध्योध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन जीवन की धूरी हुआ करती थी, लेकिन पूदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रूकावट आने लगी थी। उन्होने कहा कि गाद, कूड़ा-कचरा और गंदगी ने तमसा नदी के प्रवाह को रोक दिया था, इसके बाद यहां के लोगों ने तमसा को एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया, नदी की सफाई की गयी, नदी के किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाये गये। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस कार्य में जुटे थे और सबके प्रयास से नदी का पुनरोद्धार हो गया।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार द्वारा अप्रैल 2025 में कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात लगातार प्रदेश सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जा रहा है। इसी क्रम में उन्होने प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण नदी पुनरोद्धार योजना को सर्वोच्च प्राथमिकता से लेते हुए जनपद की ऐतिहासिक, पौणाणिक, धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण तमसा नदी को पुनर्जिवित करने की उठायी थी जिम्मेदारी। उन्होंने तमसा नदी के तट पर स्थित चन्द्रमा ऋषि आश्रम का लगातार भ्रमण किया एवं अधिकारियों के साथ बैठक कर नदी के पुनरोद्धार की कार्ययोजन तैयार कराया।
जिलाधिकारी ने तमसा नदी के जल को साफ एवं स्वच्छ बनाने के लिए सफाई कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की। जिलाधिकारी के निर्देश पर मनरेगा, स्वयं सेवी संगठनों एवं आम जनमानस के सहयोग से जनपद के अन्दर 89 किलोमीटर में बहने वाली तमसा नदी से गाद, प्लास्टिक, कचरा एवं दाह संस्कार के पश्चात फेंके हुए कपड़ों को हटाकर सफाई करायी गयी एवं तमसा नदी के जल को नहाने एवं आचमन योग्य बनाया गया।
जिलाधिकारी के प्रयास से जिला गंगा समिति एवं स्थनीय लोगों से सहयोग से एक विशेष अभियान चलाया गया। तमसा नदी गंगा की सहायक एवं प्राचीन नदी है, नदी अयोध्या, अंबेडकरनगर, आजमगढ़ एवं मऊ से प्रवाहित होते हुए जनपद बलिया में गंगा नदी में मिल जाती है। तमसा नदी का पुनर्जीवन, गंगा की सहायक नदियों की सफाई एवं संरक्षण के लिए एक व्यापक एवं प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। नमामि गंगे एक व्यापक एवं समग्र परियोजना है, जिसके अन्तर्गत गंगा एवं सहायक नदियों एवं छोटो नदियों से संरक्षण एवं जल की गुणवत्ता में सुधार एवं पर्यावरण संतुलन बनाये रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। तमसा नदी जनपद आजमगढ़ में लगभग 89 किमी के क्षेत्र में फैली हुई है तथा इसके किनारे जनपद के 111 ग्राम पंचायतें पड़ती है।
जिलाधिकारी ने शुरू से ही समस्त ग्राम पंचायतों के साथ जनपद स्तर पर बैठक कर उन्हें नदी की सफाई एवं उससे मिलने वाले लाभ के बारे में अवगत कराया। जिलाधिकारी के प्रयासों से जहां नदी पट गयी थी, वहां से गाद निकलवाया गया तथा नदी के किनारे से गंदगी को हटाया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत नदी के किनारे की खाली जमीनों की पैमाइश कराते हुए अवैध अतिक्रमण को हटाकर फलदार एवं छायादार वृक्ष लगवाये गये, जिसके फल एवं लकड़ी का प्रयोग वहां की ग्राम पंचायतों को होगा।
जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत स्टेट मिशन फार क्लीन गंगा और जिला गंगा समिति के समन्वय से तमसा नदी के संरक्षण और पुनरोद्धार के लिए व्यापक प्रयास किया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला गंगा समिति के सहयोग से स्वच्छता एवं जन जागरण अभियान के माध्यम से स्कूलों, बच्चों/युवाओं, महिलाओं एवं स्वयं सहायता समूहों, ग्राम पंचायतों, स्वयं सेवी संगठनों और स्थानीय नागरिकों की सक्रीय भागीदारी सुनिश्चित की गयी। श्रमदान के माध्यम से नदी तटों एवं घाटों से प्लास्टिक एवं ठोस कचरों को हटाकर नदी को नया जीवन देने की दिशा में ठोक कदम जिलाधिकारी महोदय द्वारा उठाया गया।
जिलाधिकारी के प्रयास से नदी के किनारे डस्टबिन रखा गया तथा नदी को साफ एवं स्वच्छ रखने हेतु साइन बोर्ड लगाकर लोगों से अपील की गयी। गंगा की सहायक नदी होने के कारण तमसा की स्वच्छता, गंगा की निर्मलता एवं अविरलता के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इसलिए जिलाधिकारी के दिशा निर्देश पर नदी की सफाई से जल गुणवत्ता में सुधार हुआ, जैव गुणवत्ता लौटी और कृषि क्षेत्र में मृदा, उर्वरता तथा सिंचाई क्षमता में वृद्धि भी हुई। नदी के पुनर्जीवन से पर्यावरण के साथ-साथ आजीविका के संसाधन मंे भी वृद्धि हुई। जिलाधिकारी के इस कार्य में ग्राम प्रधानों का विशेष सहयोग रहा। तमसा को स्वच्छ बनाने में मनरेगा का भी बड़ा योगदान रहा। मनरेगा के श्रमिकों, स्वयं सेवी संगठनों तथा संकलित प्रयास से नदी को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया।
जिलाधिकारी के प्रयास से पहली बार विगत 21 जून 2025 को तमसा नदी के तट पर स्थित चन्द्रमा ऋषि के प्रांगण में योग दिवस का आयोजन कराया गया था, जिसमें प्रभारी मंत्री अनिल राजभर एवं जनपद के तत्कालीन नोडल अधिकारी/सचिव सिंचाई जीएस नवीन कुमार के साथ-साथ बड़ी संख्या मे आम जनमानस द्वारा प्रतिभाग किया गया।
