


आजमगढ़ में महाशिवरात्रि के अवसर पर जनपद के सभी छोटे-बड़े शिवालियों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उम्र पड़ी। लोग विधि विधान के साथ भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चन किया और दुग्धाभिषेक व जलाभिषेक के साथ भगवान से परिवार के कल्याण की प्रार्थना की। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष पर रविवार को महाशिवरात्रि मनाई जा रही है। महाशिवरात्रि के अवसर पर तो लाखों की भीड़ उमड़ती रही तथा आसपास का वातावरण शिवमय हो गया है। महाशिवरात्रि में भंवरनाथ मंदिर के कपाट सुबह 3 बजे खुले जिसके बाद पूजन अर्चन का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहेगा। सुबह से ही यहाँ भक्तों की भारी भीड़ है। दोपहर में शिव बारात के साथ बड़ी संख्या में कावड़िये मंदिर पहुच कर जलाभिषेक करते हैं। रात तक मंदिर में पूजन अर्चन चलता रहता है। सुरक्षा के बीच श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव का जलाभिषेक व पूजन अर्चन किया जा रहा है। नगर की सरहद पर भंवरनाथ मंदिर सैकड़ों वर्षों से जनपदवासियों के लिये आस्था का केन्द्र बना हुआ है। बताते चलें कि जनपद में भगवान शिव के अनेक मंदिर है लेकिन भंवरनाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध मंदिर है यह मंदिर पौराणिक महत्व समेटे हुए है इस कारण यहां पर आने वाली भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मान्यता है कि मंदिर के स्थान पर आसपास के क्षेत्र में सैकड़ों साल पहले घना जंगल था तथा एक बार इस देव स्थान पर किसी निर्माण कार्य के लिये लोगों ने जंगल की सफाई का कार्य जैसे ही प्ररम्भ किया, जमीन के अंदर से हजारों की संख्या में भौंरे निकले जिससे लोग भाग खड़े हुए, इसके बाद किसी तरह जब दूसरी बार फिर खुदाई शुरू हुई तो हजारों की संख्या में भौंरे के साथ ही सांप-बिच्छु निकलने लगे और लोगों को काटने लगे। इसके उपरान्त इसी स्थल पर शिवलिंग प्रकट हुआ लोगों ने इसे भगवान की इच्छा समझा और शिवलिंग की पूजा शुरू कर दिए। भगवान शिव के अवतरित होने पर लोगों ने अपनी मनोकामना भी यहां पर रखनी शुरू कर दी और मनोकामना जब पूरे होने लगे तो दूर-दूर तक इस देव स्थान की ख्याति पहुंचने लगी। धीरे-धीरे हजारों की संख्या में लोग यहां पूजा अर्चन और मनौती मानने के लिये उमड़ने लगे। इसके बाद यहां पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया जो कि जनपद के साथ ही आसपास के जिलों के लोगों के लिये आस्था का केन्द्र बना। यहां पर लोग पुत्र की कामना के साथ आते हैं तो युवा अच्छी नौकरी तथा अच्छे जीवनसाथी की कामना के साथ पूजन अर्चन करते हैं। यहां पर शादी विवाह के कार्य संपन्न होते हैं। लोगों की मान्यता है कि यहां पर विवाह के दौरान भगवान शिव तथा अन्य देवों का सीधा आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन सफल रहता है।
