UPSC की सिविल सर्विसेज परीक्षा में 345 रैंक मिलने के बाद गांव पहुंचने पर रुद्र प्रताप सिंह का गांव के लोगों ने ढोल ताशे और फूल माला संग किया स्वागत, तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को दी महत्वपूर्ण सलाह

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आजमगढ़ के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में चेवता गांव में शनिवार को अपने गांव पहुंचने पर UPSC की सिविल सर्विसेज की परीक्षा में 345 रैंक पाने पर रुद्र प्रताप सिंह का पूरे गांव के लोगों ने स्वागत किया। रुद्र प्रताप को मिठाई खिलाकर और माला पहना कर उनका स्वागत किया गया। जबसे रुद्र प्रताप के देश की सबसे बड़ी परीक्षा में सफलता मिलने की गांव के लोगों को सूचना मिली है तभी से पूरे गांव में हर्षोल्लास का वातावरण है। वहीं रुद्र प्रताप के परिजन भी फूले नहीं समा रहे हैं। रुद्र प्रताप के पिता अशोक सिंह आर्मी से रिटायर हैं और वर्तमान में दीवानी कोर्ट में वकालत करते हैं। जबकि मां नीलम सिंह ग्रहणी हैं। दोनों ने अपने पुत्र की शिक्षा दीक्षा में कोई कमी नहीं होने दी। रुद्र प्रताप हालांकि गांव में ही प्राइमरी तक की शिक्षा ग्रहण किए। इसके बाद वह पिता के साथ जहां पोस्टिंग थी वहां पर शिक्षा ग्रहण किए। बाद में 10 और 12 तक की शिक्षा उन्होंने आजमगढ़ शहर के चिल्ड्रन कॉलेज यूपी बोर्ड से पूरी की। माता-पिता अपने पुत्र के होनहार होने के साथ मेहनत और धैर्य को सफलता का राज बता रहे हैं। वहीं रुद्र प्रताप अपनी सफलता का श्रेय किसी एक को देना नहीं चाहते। बल्कि उन्होंने कहा कि उनके ऊपर परिवार के लोगों के साथ गांव के लोगों का इतना आशीर्वाद है कि कहना मुश्किल है कि किसको वह पूरी तरह से श्रेय दे सकें। पत्नी रेशु सिंह जो पल्हनी के डुगडुगवां प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक हैं वह भी अपने ढाई साल के3 बच्चे के साथ पति की तैयारी में पूरी मदद कीं। बहरहाल शनिवार को गांव पहुंचते ही ढोल ताशे के साथ रुद्र प्रताप का स्वागत किया गया। जुलूस की शक्ल में लोग घर से करीब 500 मीटर दूर डीह बाबा के स्थान पर पहुंचे। जहां पर मंदिर पर विधि विधान के साथ उन्होंने पूजा अर्चना की और भगवान को इस सफलता की सीढ़ी पर चढ़ने देने के लिए उन्होंने प्रार्थना की। बता दें कि अधिवक्ता अशोक सिंह के रुद्र प्रताप सिंह बड़े पुत्र हैं। छोटे पुत्र डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह BHU से BAMS और MD हैं। रुद्र प्रताप सिंह वर्तमान में मध्य प्रदेश छिंदवाड़ा में आईबी में एसीआईओ वन के पद पर तैनात हैं। आईबी में वह 2018 से ही पोस्टेड है और उनकी पहली पोस्टिंग नागालैंड में थी। बाद में उनको मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ भेजा गया। जहां से प्रमोशन होकर छिंदवाड़ा पहुंचे। 2020 के दौरान उन्होंने IB की नौकरी के साथ ही सिविल सर्विसेज की ऑन लाइन तैयारी की। अब चौथे प्रयास में उनको सफलता मिली। इससे पूर्व वह 2023 में एक बार इंटरव्यू तक पहुंचे थे। अगले साल प्रीलिम्स भी नहीं पास कर सके। लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद भी हौसला कम नहीं होने दिया। रुद्र प्रताप ने 2016 में जेके इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड फिजिक्स प्रयागराज यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक पास किया था। लेकिन सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने हिंदी माध्यम से हिंदी लिटरेचर विषय का उपयोग किया। बीटेक संबंधित विषयों से हटकर हिंदी विषय को चुनने पर उन्होंने कहा कि शुरू से उनका पसंदीदा विषय था और उनके लिए यह आसान भी पड़ता। मैथ्स भी ले सकते थे लेकिन यह नौकरी के दौरान तैयार करना कठिन होता। उन्होंने विषय चुनने के लिए सोच समझ कर फैसला लिया। कहा कि इंटरव्यू में उनसे हिंदी से संबंधित कोई सवाल नहीं हुआ। जबकि ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पूर्वोत्तर राज्य में पिछले दिनों हुई हिंसा और अन्य इसी प्रकार से संबंधित सवालों का उन्होंने आधे घंटे तक जवाब दिया। तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को उन्होंने सुझाव दिया कि केवल सिविल सर्विसेज परीक्षा के भरोसे ही तैयारी ना करें। एक विकल्प करियर का बना कर रखें। उसके बाद निश्चिंत होकर ही तैयारी करें। क्योंकि अभ्यर्थियों की संख्या के हिसाब से पद बहुत ही कम होते हैं। जिससे कई बार असफलता मिलने पर अभ्यर्थी घोर निराश हो जाते हैं।

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