






आजमगढ़ – बुढ़नपुर तहसील क्षेत्र में इन दिनों भारत गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडर की आपूर्ति का संकट इस कदर गहरा गया है कि लोगों को खाना बनाने के लाले पड़ गए हैं। सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’ के दावों के बीच, अतरौलिया की भारत गैस एजेंसी उपभोक्ताओं को ‘सर्वर’ और ‘टोकन’ के मकड़जाल में उलझाकर दर-दर भटकने को मजबूर कर रही है। हैरानी की बात यह है कि दोपहर के करीब 12:30 बजे ही एजेंसी का मुख्य गेट बंद मिला, जिससे दूर-दराज से आए उपभोक्ता चिलचिलाती धूप में घंटों परेशान रहे।
गैस लाओगे तभी मिलेगा खाना: घरों में छिड़ा ‘गृहयुद्ध’
गैस की किल्लत अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि पारिवारिक कलह का कारण बन गई है। गदनपुर निवासी विजय कुमार ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनकी पत्नी ने साफ चेतावनी दी है— “जब तक गैस सिलेंडर नहीं लाओगे, तब तक घर पर खाना नहीं मिलेगा।” वहीं गोरथानी निवासी लवकुश और उपभोक्ता कृष्णा पटवा ने बताया कि चार-चार दिन पहले बुकिंग और डीएसी (DAC) कोड मिलने के बाद भी उन्हें एजेंसी से बैरंग लौटा दिया गया। उपभोक्ताओं का सीधा और गंभीर आरोप है कि भारत गैस एजेंसी में सिलेंडर की कृत्रिम किल्लत पैदा कर उन्हें अवैध रूप से अधिक कीमतों पर बेचा जा रहा है, जबकि जायज बुकिंग वालों को टरकाया जा रहा है।
मैनेजर का ‘टोकन’ वाला राग, एसडीएम ने दी कड़ी चेतावनी
इस पूरे प्रकरण पर भारत गैस एजेंसी के मैनेजर रामकेश यादव का तर्क है कि टोकन व्यवस्था के तहत प्रतिदिन केवल 60 से 65 लोगों को गैस दी जा रही है और प्राथमिकता एक सप्ताह पुरानी बुकिंग वालों को है। हालांकि, अधिक कीमत वसूली और गेट बंद रखने के आरोपों पर उन्होंने जांच की बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (SDM) बुढ़नपुर, अभय राज पांडेय ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि गैस वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या उपभोक्ताओं के शोषण की शिकायत की पुष्टि होती है, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
