






आजमगढ़। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव के शहादत दिवस पर प्रयास सामाजिक संगठन की ओर से बिलारी लखनपुर स्थित बालिका विद्यालय में उनके चित्र के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धाजलि दी गई।
महापुरूषों के कृतित्व को याद करते हुए प्रयास संस्था के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने बताया कि 1931 में अविभाजित भारत के लाहौर सेंट्रल जेल मे तीनों क्रांतिकारियों को अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी पर चढ़ा दिया था क्योंकि उन्होंने देशवासियों को अंग्रेजों से मुक्ति दिलाने के लिए सेंट्रल असेम्बली में रिक्त स्थान पर बम फेंका था ताकि इसकी आवाज से समूचा भारत जागृत हो और अंग्रेजी हुकूमत की चूल्हें हिल जाये।
विद्यालय के प्रबंधक शांति सिंह ने कहा कि चलो फिर आज वो नजारा याद कर लें शहीदों के दिल में थी जो ज्वाला याद कर लें, जिसमे बहकर आजादी पहुंची थी किनारे पर, देशभक्तों के खून की वो धारा याद कर लें। अंग्रेजी हुकूमत जानती थी कि भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव को फांसी पर लटकाना आसान नहीं था क्योंकि इन क्रांतिकारियों के समर्थन में पूरा भारत जनाक्रोशित था इसलिए अंग्रेजों ने इन्हें एक दिन पूर्व ही 23 मार्च 1931 को अचानक फांसी पर लटका दिया था। तीनों क्रांतिकारियों ने मुस्कुराते हुए फांसी के फंदे पर चढ़ गये। प्रयास द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए श्रीमती शांति सिंह, दुर्गा प्रसाद, कतवारू, अमर सिह यादव, रोहित कुमार, अंकुर, कुमारी आरती, शशिबाला, गुंजन, रिंकी, अनिल सिंह आदि को सम्मानित किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों में स्टेशनरी सामग्री का वितरण भी हुआ।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान सुधा सिंह, सचिव इंजी सुनील यादव, शिव प्रसाद पाठक, मान बहादुर सिंह, प्रमोद सिंह, राजीव विश्वकर्मा, गुड्डू सिंह, रिखदेव, शाहआलम, अमित सिंह सहित शिक्षक व छात्राएं मौजूद रहे।
