आजमगढ़ में जिला पंचायत कार्यालय का वीडियो वायरल, खुलेआम रिश्वतखोरी के आरोप से मचा हड़कंप, बीजेपी पूर्व जिला अध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने उठाया सवाल, की कार्रवाई की मांग

Uncategorized

आजमगढ़ में सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” के दावों के बीच एक बार फिर हकीकत सवालों के घेरे में खड़ी दिखाई दे रही है। जिला पंचायत विभाग से जुड़ा एक कथित वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में पटल पर बैठा एक बाबू खुलेआम नोटों की गड्डी लेते और बिना किसी झिझक के उन्हें गिनते हुए नजर आ रहा है। इस दृश्य ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकारी दफ्तरों में रिश्वतखोरी अब एक सामान्य प्रक्रिया बन चुकी है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब भारतीय जनता पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता कर जिला पंचायत विभाग पर गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रहा कर्मचारी टेंडर से जुड़े कार्यों को देखता है और लंबे समय से कमीशनखोरी के नेटवर्क का हिस्सा है। उनके अनुसार, यह कोई एक दिन की घटना नहीं बल्कि वर्षों से चल रही व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें बिना कमीशन के फाइल आगे नहीं बढ़ती और भुगतान तक अटक जाता है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि जनपद में करोड़ों रुपये के विकास कार्य ठप पड़े हैं, क्योंकि लेनदेन तय नहीं हो पा रहा। कई ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी निविदाएं निकल चुकी हैं, काम भी पूरा हो चुका है, लेकिन भुगतान नहीं हो रहा। वजह साफ बताई गई—कमीशन। उनका कहना है कि अब जबकि टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी है और सबसे कम बोली लगाने वाले को काम मिलना अनिवार्य है, तो इस पारदर्शिता ने पुराने “सेटिंग सिस्टम” को झटका दिया है। ऐसे में विभाग के अंदर कथित तौर पर कमीशन वसूली के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदारों को मजबूरी में भुगतान पाने के लिए मोटी रकम “कमीशन” के रूप में देनी पड़ रही है। दावा किया गया कि एक करोड़ रुपये के काम में लगभग 25 लाख रुपये तक का कमीशन लिया जाता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा विभागीय स्तर पर बंटता है और बाकी पार्टी में शीर्ष स्तर तक पहुंचता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से वीडियो सामने आया है, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।
सूरज प्रकाश श्रीवास्तव ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मामले की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की थी और 24 घंटे के भीतर कार्रवाई की मांग की थी। उनके अनुसार, अधिकारी ने जांच समिति गठित करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले को राजनीतिक रंग देते हुए उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि जिले में सपा से जुड़े बड़े लोगों की वजह से ऐसे मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। उनका कहना है कि विभाग में तैनात संबंधित बाबू की कथित तौर पर अच्छी-खासी संपत्ति है और वह राजनीतिक कार्यक्रमों में प्रभावशाली लोगों के साथ नजर आता रहा है, जिससे पूरे नेटवर्क पर संदेह गहराता है।
वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। आम जनता का कहना है कि अगर इस तरह खुलेआम पैसे का लेनदेन हो रहा है, तो यह केवल एक व्यक्ति की बात नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की खामी को दर्शाता है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है—क्या इस मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे या यह भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
फिलहाल, यह प्रकरण आजमगढ़ में सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *