






आजमगढ़ के शहर कोतवाली क्षेत्र स्थित शिवाजी नगर के पास जियो कंपनी के एरिया मैनेजर से हुई लूट की घटना विवादों में घिर गई है। मामले में मुठभेड़ के दौरान घायल हुए अभिषेक सिंह को लेकर परिजनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सवालों के बीच पुलिस ने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह साक्ष्यों पर आधारित बताया है।
परिजनों व जनप्रतिनिधियों का विरोध
घायल अभिषेक सिंह के परिजनों ने उसे निर्दोष बताते हुए पुलिस पर गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाया है। इस बीच भाजपा के एमएलसी, जिला अध्यक्ष समेत कई जनप्रतिनिधि उसके घर पहुंचे और परिजनों के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस का दावा—तकनीकी साक्ष्यों पर कार्रवाई
मामले में एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने इस केस में व्यापक स्तर पर जांच की है। उन्होंने बताया कि घटना के खुलासे के लिए करीब 1000 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, जिनमें से लगभग 100 कैमरों में संदिग्धों की गतिविधियां सामने आईं।
तीन आरोपी हुए चिन्हित
पुलिस के अनुसार जांच में तीन आरोपियों की पहचान स्पष्ट रूप से हुई है—
धर्मेंद्र उर्फ अभिषेक सिंह निवासी चक लालचंद (थाना जीयनपुर),
अंशुमान सिंह निवासी चक लालचंद (थाना जीयनपुर),
राहुल राय निवासी गढ़वल (थाना जीयनपुर)।
एसपी सिटी के मुताबिक, इन तीनों के चेहरे स्पष्ट रूप से फुटेज में दिखाई दिए हैं, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।
आरोपी पर पहले से दर्ज हैं मुकदमे
एसपी सिटी ने यह भी बताया कि अभिषेक सिंह के खिलाफ पहले से दो आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि परिजनों द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यात्मक नहीं हैं।
जांच जारी, साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका
पुलिस का कहना है कि यदि आरोपी पक्ष के पास कोई साक्ष्य या तथ्य हैं, तो वे जांच टीम के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। फिलहाल पुलिस विधिक कार्रवाई में जुटी है।
जीरो टॉलरेंस नीति पर कार्रवाई
एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने दो टूक कहा कि आजमगढ़ पुलिस अपराध के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा।
मामला फिलहाल जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर पुलिस अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और जनप्रतिनिधि निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
