






आजमगढ़, बलरामपुर/पटवध से बबलू राय। कहते हैं कि डॉक्टर धरती पर भगवान का रूप होते हैं। कुछ चिकित्सक केवल इलाज ही नहीं करते, बल्कि निराश हो चुके मरीजों और उनके परिजनों को नई उम्मीद भी देते हैं। जनपद आजमगढ़ के जुनैदगंज स्थित श्याम हॉस्पिटल में हाल के दिनों में कई गंभीर मरीजों का सफल उपचार किया गया, जिससे उनके परिवारों में खुशी का माहौल है।
परिजनों का कहना है कि जिन मरीजों के इलाज को लेकर बड़े शहरों के अस्पतालों में भी उम्मीदें टूट चुकी थीं, उन्हें श्याम हॉस्पिटल में नया जीवन मिला। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. करुण श्रीवास्तव एवं उनकी टीम की देखरेख में मरीजों का उपचार किया गया, जिसके बाद उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
इन्हीं मरीजों में रोशनी राजभर का नाम प्रमुख है। वह गंभीर मैनिन्जाइटिस (Meningitis) से पीड़ित थीं। परिजनों के अनुसार उन्हें कई अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन लगातार हालत बिगड़ती गई और उन्हें कई जगह से रेफर कर दिया गया। बेहोशी की स्थिति में श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराए जाने के बाद लगभग दस दिनों तक गहन उपचार और निगरानी की गई। उपचार के बाद रोशनी को होश आया और धीरे-धीरे उनकी स्थिति सामान्य होने लगी। स्वस्थ होने पर उन्हें घर भेज दिया गया।
वहीं राहुल कुमार गंभीर स्पाइन संबंधी समस्या से जूझ रहे थे। स्थिति इतनी गंभीर थी कि उनके हाथ-पैर तक काम नहीं कर रहे थे। परिजनों ने लखनऊ सहित अन्य स्थानों पर उपचार कराया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। इसके बाद उन्हें श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकीय देखरेख और उपचार के बाद उनकी स्थिति में लगातार सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर अपने घर लौट सके।
आजमपुर निवासी आशा देवी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित थीं। परिजनों के मुताबिक अन्य अस्पतालों से निराशा मिलने के बाद उन्हें श्याम हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। यहां लगातार उपचार और देखभाल के बाद उनकी सेहत में सुधार हुआ और वह स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच लौट आईं।
इसी प्रकार रणविजय नामक मरीज लीवर एब्सेस एवं हेमेटोमा जैसी गंभीर समस्या से जूझ रहे थे। परिजनों ने दिल्ली तक उपचार कराया, लेकिन संतोषजनक परिणाम नहीं मिले। बाद में उन्हें श्याम हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉ. करुण श्रीवास्तव और उनकी टीम ने उपचार किया। वर्तमान में मरीज के स्वास्थ्य में काफी सुधार बताया जा रहा है।
स्वस्थ हुए मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकों एवं पूरी मेडिकल टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि जब सभी उम्मीदें समाप्त होती नजर आ रही थीं, तब श्याम हॉस्पिटल ने न केवल उपचार किया बल्कि उन्हें जीवन के प्रति नई आशा भी दी।
परिजनों का मानना है कि सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं के साथ किया गया उपचार ही मरीजों के लिए सबसे बड़ी ताकत बनता है। स्वस्थ होकर लौटे मरीजों के चेहरों की मुस्कान और परिवारों की संतुष्टि किसी भी चिकित्सक के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
नोट: चिकित्सा संबंधी सफलता की खबरों में संतुलन बनाए रखने के लिए “चमत्कार” या “पूरी तरह ठीक होने” जैसे दावों की जगह “परिजनों के अनुसार”, “स्वास्थ्य में सुधार हुआ” या “चिकित्सकीय देखरेख में लाभ मिला” जैसे वाक्यांश अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।
