
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय परिसर में करीब एक हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष, इतिहास, कानून व्यवस्था और आजमगढ़ की पहचान को लेकर जमकर हमला बोला। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि बेटी के सम्मान से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। जैसे ही मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तत्काल पुलिस अधिकारियों को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।
सीएम योगी ने कहा, “हम उस संस्कृति और संस्कार में पले-बढ़े हैं जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी सबकी बेटी होती है। बेटी चाहे किसी भी परिवार, जाति या दल से जुड़ी हो, उसका सम्मान हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए।”
इसके बाद मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव पर सीधा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि दूसरों को उपदेश देने से पहले अपने लोगों को भी मर्यादित भाषा का पाठ पढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अखिलेश जी, दूसरों को नसीहत देने से पहले अपने चेले-चपाटों को भी समझाइए कि भाषा में संयम रखें। दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले यह भी देखिए कि आपके लोग बहन-बेटियों के लिए कैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। यदि उन्हें संस्कारित नहीं कर सकते तो उन्हें हमारे हवाले कर दीजिए।”
सभा में मुख्यमंत्री ने महाराजा सुहेलदेव के शौर्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विदेशी आक्रांताओं को करारा जवाब दिया था और उनके पराक्रम के कारण विदेशी हमलावर भारत की धरती पर आने से डरते थे। उन्होंने कहा कि जब समाज जाति, क्षेत्र, भाषा और परिवारवाद के नाम पर बंट गया, तभी देश को विदेशी आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि महाराजा सुहेलदेव के बाद की पीढ़ियां उनके आदर्शों से प्रेरणा नहीं ले सकीं, जिसका परिणाम देश ने भुगता। उन्होंने पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक छोटी सी चूक और आपसी बिखराव ने देश को भारी नुकसान पहुंचाया।
बहराइच का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले वहां विदेशी आक्रांता सालार मसूद उर्फ गाजी मियां के नाम पर आयोजन होते थे, लेकिन उनकी सरकार ने यह परंपरा बदलकर महाराजा सुहेलदेव के नाम पर आयोजन शुरू कराए। उन्होंने कहा, “नया भारत गुलामी के किसी भी प्रतीक को स्वीकार नहीं करेगा। आज बहराइच में महाराजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक राष्ट्र गौरव का प्रतीक बन चुका है।”
अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने आजमगढ़ की पुरानी छवि पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह ऋषियों-मुनियों और सांस्कृतिक विरासत की भूमि है, लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब इसकी पहचान पर संकट खड़ा हो गया था। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि आखिर क्यों हर आतंकी घटना के बाद आजमगढ़ का नाम चर्चा में आता था और क्यों जिले को गलत कारणों से बदनाम किया जाता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उनकी सरकार ने आजमगढ़ को नई पहचान देने का काम किया है। विश्वविद्यालय, संगीत महाविद्यालय और अन्य विकास परियोजनाओं के माध्यम से जिले को शिक्षा और विकास का नया केंद्र बनाया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के हर गरीब, किसान, नौजवान और जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है, लेकिन यदि कोई गरीब की जमीन पर कब्जा करेगा, बेटी की सुरक्षा से खिलवाड़ करेगा या व्यापारियों को परेशान करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने कई बार तालियां बजाकर उनका स्वागत किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आजमगढ़ की धरती से दिया गया यह बयान प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में नई बहस को जन्म दे सकता है।
