
आजमगढ़। वाहन चालक कल्याण समिति के बैनर तले विभिन्न मांगों को लेकर रिक्शा स्टैंड पर चल रहा वाहन चालकों का अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को परिवहन विभाग के अधिकारियों से वार्ता के बाद समाप्त हो गया। अधिकारियों ने चालक प्रतिनिधियों की समस्याएं सुनते हुए उन्हें उच्च स्तर तक पहुंचाने का भरोसा दिया।
धरना दे रहे चालकों ने कहा कि देशभर के वाहन चालकों के हितों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय चालक आयोग का गठन किया जाए। साथ ही ड्राइवर सुरक्षा बोर्ड और ड्राइवर वेलफेयर बोर्ड अथॉरिटी को कानूनी अधिकार दिए जाएं, ताकि चालक वर्ग की समस्याओं का प्रभावी ढंग से समाधान हो सके। उन्होंने वाहन चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग से विशेष कानून बनाए जाने की भी मांग उठाई।
चालकों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रक एवं अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए विश्रामगृह, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि लंबी दूरी तय करने वाले चालकों के लिए ऐसी बुनियादी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं।
समिति के पदाधिकारियों ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले चालकों को शहीद का दर्जा देने तथा उनके आश्रितों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी मांग की। उनका कहना था कि देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में चालकों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उनके कल्याण और सुरक्षा के लिए अब तक पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं।
धरनास्थल पर पहुंचे एआरटीओ (प्रवर्तन) अतुल यादव, सुनील दत्त तथा संभागीय परिवहन अधिकारी ने चालक प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी मांगों और समस्याओं को विस्तार से सुना। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि चालक हितों से जुड़े सभी मुद्दों को शासन और उच्च अधिकारियों के समक्ष भेजा जाएगा तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई का प्रयास किया जाएगा।
वार्ता के बाद चालक कल्याण समिति ने फिलहाल अपना अनिश्चितकालीन धरना समाप्त करने की घोषणा की। हालांकि समिति ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में फिर से आंदोलन शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
