
आजमगढ़। जिले के चर्चित रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल में नवजात शिशुओं के कथित रूप से बदलने के मामले में जिला प्रशासन की जांच के बाद बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाया गया है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय की ओर से सिधारी थाने में तहरीर देकर अस्पताल के कर्मचारियों, प्रबंधन से जुड़े लोगों तथा दूसरे दंपती समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
डीएम से शिकायत के बाद गठित हुई थी जांच समिति
जानकारी के अनुसार, उप मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी डॉ. आलेन्द्र कुमार ने सिधारी थाने में दी गई तहरीर में बताया कि पुरानी कोतवाली क्षेत्र के आसिफगंज निवासी कमलेश वर्मा ने 4 जून 2026 को जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी पत्नी नेहा सोनी ने 12 मई 2026 को बलिया जिला महिला अस्पताल में जन्मे अपने नवजात पुत्र को उपचार के लिए तिवारीपुर स्थित रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल में भर्ती कराया था।
शिकायत के मुताबिक, 27 मई को अस्पताल प्रबंधन ने उनके पुत्र की जगह एक नवजात बच्ची उन्हें सौंप दी। जब उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि उनके यहां पुत्र का जन्म हुआ था, तो अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने उन्हें चुप रहने और जेल भेजने की धमकी दी।
सोशल मीडिया पर मामला आने के बाद वापस मिला नवजात
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रबंधक डॉ. दीपक कुमार पांडेय अपने स्टाफ के साथ कंचनपुर गांव पहुंचे और वहां से उनका वास्तविक नवजात पुत्र वापस दिलाया। इसके बाद बच्चे को दोबारा अस्पताल में भर्ती कर उपचार के बाद 28 मई को डिस्चार्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके पुत्र को बेचने की कोशिश की गई और पूरे मामले को दबाने के लिए लगातार धमकियां दी गईं।
जांच में सामने आई अस्पताल कर्मियों की लापरवाही
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी नगर और अपर मुख्य चिकित्साधिकारी की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति ने 10 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों नवजात शिशुओं के अस्पताल में भर्ती होने के एक-दो दिन बाद अस्पताल कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बच्चे आपस में बदल गए। रिपोर्ट के अनुसार, स्टाफ नर्स नीतू यादव ने अपने बयान में स्वीकार किया कि मालिश के दौरान बच्चों के पहचान टैग खराब हो गए थे और नए टैग लगाने में गलती हो गई, जिससे दोनों बच्चों की पहचान बदल गई।
दूसरे दंपती की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच समिति ने यह भी पाया कि माधवी यादव ने अस्पताल में पहले ही शिकायत की थी कि उसके यहां पुत्री का जन्म हुआ था, जबकि उसे पुत्र सौंपा गया है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
रिपोर्ट के अनुसार, माधवी यादव ने 17 मई को रसैपुर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में जांच कराकर यह पुष्टि भी कर ली थी कि उसके यहां पुत्री का जन्म हुआ था। इसके बावजूद वह और उसके पति कन्हैया यादव अस्पताल से नवजात लड़के को अपने साथ लेकर चले गए। जांच समिति ने इस आधार पर दोनों की भूमिका भी संदिग्ध मानी है।
छह लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
जांच रिपोर्ट के आधार पर उप मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से सिधारी थाने में नीतू यादव, अनरजीत चौहान, जयकृष्ण शुक्ल, शशि कुमार पांडेय, माधवी यादव और कन्हैया यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने सभी आरोपों के संबंध में एफआईआर दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
