
आजमगढ़ : एआईएमआईएम पार्टी के प्रदेश शौकत अली सोमवार को आजमगढ़ पहुंचे और दिवंगत समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक आलमबदी आज़मी के आवास पर पहुंचकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत विधायक से जुड़ी कई पुरानी यादें भी साझा कीं।
मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि
“हमने सिर्फ एक विधायक ही नहीं खोया है, बल्कि कौम-ओ-मिल्लत का एक बहुत बड़ा सरमाया खो दिया है, जिसकी भरपाई मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है।”
उन्होंने आगे कहा कि:
दिवंगत विधायक हमेशा सलाह देते थे कि राजनीति में कभी झूठ मत बोलना और राजनीति केवल सेवा/ख़िदमत के उद्देश्य से करना।
दिवंगत विधायक ने अपनी राजनीतिक यात्रा डॉ. जलील फ़रीदी के साथ मुस्लिम मजलिस से शुरू की थी।
मीडिया से बातचीत के दौरान शौकत अली ने AIMIM चीफ असदुद्दीन औवैसी के बयान आज वक्त है, बात कर लो, बाद में रोना नहीं वाले पर प्रतिक्रिया दी हैं। उन्होंने कहा एआईएमआईएम की ओर से इंडिया गठबंधन के लिए चेतावनी और ऑफर दोनों है।
उन्होंने बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां उनकी पार्टी ने तेजस्वी यादव से केवल 5 सीटें मांगी थीं, लेकिन उन्हें सीटें नहीं दी गईं, जबकि मल्लाह समाज की 2.5-4% आबादी वाले मुकेश सहनी की पार्टी से गठबंधन किया गया। उन्होंने आगे कहा कि बाद में विपक्षी दल यह आरोप न लगाएं कि AIMIM की वजह से उनकी सीटें कम हुईं।
वे चाहते हैं कि तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां जैसे अखिलेश यादव, मायावती और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ें ताकि बीजेपी को सत्ता में आने से रोका जा सके।
AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सीटों का कोई झगड़ा नहीं है और यदि पूर्ण बहुमत की सरकार बनती है, तो वे कैबिनेट या सरकार में शामिल होने का दावा भी नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्षी दल सहमति नहीं बनाते हैं, तो उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है, जबकि बाकी 203 सीटें अखिलेश यादव व अन्य के लिए छोड़ सकती है ताकि बीजेपी को हराया जा सके।
शौकत अली ने दिल्ली की जंतर मंतर पर हुए युवाओं के आंदोलन को लेकर कहा कि 2014 के बाद पहली बार मोदी सरकार के खिलाफ छात्रों और युवाओं का इतना बड़ा गैर-राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हुआ। वे लगातार हो रहे पेपर लीक से परेशान थे। शौकत अली ने उनके हौसले और लगभग एक महीने तक चले विरोध प्रदर्शन की तारीफ की, जिसने सरकार को झुकने पर मजबूर किया।
पेपर लीक को लेकर कानून बनाए जाने के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कानून बनाना एक बात है और उसका सही तरीके से लागू होना दूसरी बात। केवल नए कानून बनाने से अपराध नहीं रुकेंगे जैसे हत्या और बलात्कार के कड़े कानून होने के बाद भी अपराध होते हैं, इसके लिए समाज में जागरूकता जरूरी है।
कहा कि विपक्ष जैसे कांग्रेस और अन्य दल) इस आंदोलन का श्रेय या राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा था—लेकिन युवाओं की समझदारी से यह आंदोलन एकजुट रहा और कमजोर नहीं पड़ा।
युवाओं के इस दबाव के कारण ही प्रधानमंत्री को खुद आनन-फानन में वीडियो संदेश जारी करने पड़े। लोकतंत्र में असली ताकत जनता की होती है, और युवा जिस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, वही बदलाव तय करता है।
