
आजमगढ़। दुग्धशाला विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनपद स्तरीय डेयरी कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी राकेश कुमार पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन तथा शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि नन्द बाबा दुग्ध मिशन का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, संग्रहण एवं विपणन व्यवस्था को मजबूत करने तथा पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने पशुपालकों से विभागीय योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और वैज्ञानिक तरीके से डेयरी व्यवसाय अपनाने की अपील की।
उन्होंने देशी नस्ल की गायों के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि देशी गायों का दूध गुणवत्तापूर्ण एवं स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र प्राकृतिक एवं जैविक खेती के लिए उपयोगी हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तरीके से देशी नस्ल की गायों का पालन किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा।
सीडीओ ने कहा कि डेयरी व्यवसाय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाकर दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र पशुपालकों को लाभान्वित किया जाए।
कार्यक्रम में वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी, नन्द बाबा दुग्ध मिशन ने विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। वहीं विशेषज्ञों ने आधुनिक डेयरी प्रबंधन, वैज्ञानिक चारा प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पादन, कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, पशु बीमा, दुग्ध प्रसंस्करण एवं विपणन सहित विभिन्न विषयों पर पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
इस अवसर पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. मुकेश गुप्ता, जिला युवा कल्याण अधिकारी सुल्तान सिंह, वरिष्ठ दुग्ध निरीक्षक एवं नोडल अधिकारी नन्द बाबा दुग्ध मिशन, संबंधित विभागों के अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, दुग्ध उत्पादक तथा बड़ी संख्या में पशुपालक मौजूद रहे।
