
आजमगढ़। कप्तानगंज थाना क्षेत्र में चिकित्सकीय लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि गलत इंजेक्शन और दवाओं के इस्तेमाल से नवजात की हालत इतनी बिगड़ गई कि संक्रमण बढ़ने पर उसका दाहिना हाथ काटना पड़ा। पीड़ित पिता की तहरीर पर पुलिस ने तीन डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई करते हुए दोनों संबंधित क्लीनिकों को सील कर दिया है।
पीड़ित चंद्रकेश यादव के अनुसार, 14 जून को उनकी पत्नी की डिलीवरी सुरक्षा पाली क्लिनिक में हुई थी। दो दिन बाद नवजात की तबीयत बिगड़ने पर उसे पास स्थित चाइल्ड केयर क्लिनिक में भर्ती कराया गया। आरोप है कि वहां बच्चे को गलत इंजेक्शन और दवाएं दी गईं तथा गंभीर स्थिति के बावजूद समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर नहीं किया गया।
परिजनों ने बताया कि हालत लगातार बिगड़ने पर बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लखनऊ के सैनिक अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने संक्रमण अधिक फैल जाने के कारण बच्चे की जान बचाने के लिए उसका दाहिना हाथ काटने का निर्णय लिया। ऑपरेशन के बाद बच्चे की जान तो बच गई, लेकिन वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गया।
वहीं सुरक्षा पाली क्लिनिक के डॉ. रमणीक श्रीवास्तव ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके यहां केवल प्रसव कराया गया था। उन्होंने दावा किया कि नवजात को पीलिया की शिकायत होने पर परिजनों को चाइल्ड स्पेशलिस्ट से इलाज कराने की सलाह दी गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन.आर. वर्मा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सुरक्षा पाली क्लिनिक और चाइल्ड केयर क्लिनिक को सील कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उधर, कप्तानगंज पुलिस ने डॉ. कन्हैयालाल श्रीवास्तव, डॉ. संतोष अस्थाना और डॉ. मनीष पाण्डेय के खिलाफ चिकित्सकीय लापरवाही का मुकदमा दर्ज कर लिया है। थानाध्यक्ष प्रदीप कुमार ने बताया कि मामले की जांच उप निरीक्षक गंगा राम को सौंपी गई है। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
