
आजमगढ़। मुस्लिम पवरिया-पमरिया बिरादरी को उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की अनुमन्य सूची में शामिल करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष यूथ नुरुल हुदा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के बाद पत्रकारों से बातचीत में नुरुल हुदा ने कहा कि मुस्लिम पवरिया-पमरिया बिरादरी उत्तर प्रदेश के लगभग प्रत्येक जिले में निवास करती है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से बेहद पिछड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस बिरादरी को सत्ता और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए इसे अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में शामिल किया जाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में इस संबंध में पहले भी प्रकरण चल चुका है। आयोग द्वारा पवरिया जाति की स्थिति और जनसंख्या का अध्ययन करने के लिए वर्ष 2013 में आजमगढ़, देवरिया, कुशीनगर और वाराणसी जिलों को चिन्हित कर सर्वेक्षण कराया गया था।
नुरुल हुदा ने बताया कि आजमगढ़ में सगड़ी तहसील के जीयनपुर, चांदपट्टी, रौनापार, आजमपुर, कंधरापुर समेत मेहनगर तहसील के क्षेत्रों में पवरिया बिरादरी की स्थिति का अध्ययन किया गया था। इसी तरह देवरिया, कुशीनगर और वाराणसी में भी संबंधित गांवों में जांच की गई थी।
उन्होंने कहा कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के पत्रों के क्रम में मुस्लिम पवरिया-पमरिया जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग की अनुमन्य सूची में शामिल करने के संबंध में सुनवाई 20 अगस्त 2026 को सुबह 11:30 बजे, कक्ष संख्या 315, उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग कार्यालय, लखनऊ में प्रस्तावित है।
नुरुल हुदा ने दावा किया कि वर्ष 1980 के मंडल आयोग की सूची में पवरिया जाति का उल्लेख है, लेकिन उनके अनुसार उसमें मुस्लिम शब्द छूट गया। उन्होंने कहा कि बिहार में पवरिया-पमरिया मुस्लिम बिरादरी को अत्यंत पिछड़े वर्ग में स्थान दिया गया है। उन्होंने सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग, रोहिणी आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित विभिन्न रिपोर्टों का हवाला देते हुए मुस्लिम पवरिया-पमरिया को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी बिरादरी बताया।
उन्होंने कहा कि आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी इस बिरादरी से कोई विधायक, सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधान परिषद सदस्य या नगर अध्यक्ष नहीं बना है और न ही कोई आईएएस अथवा आईपीएस अधिकारी हुआ है। उन्होंने इसे राजनीतिक और सामाजिक पिछड़ेपन का उदाहरण बताते हुए सरकार से विशेष कदम उठाने की मांग की।
सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने बिहार के कर्पूरी ठाकुर फार्मूले की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की मांग की। इसके साथ ही मुस्लिम पवरिया, नट, भाट, गदेहड़ी, फकीर-जोगी, मोची समेत अन्य अति पिछड़ी जातियों को इसमें शामिल करने की मांग की गई।
ज्ञापन में पवरिया-पमरिया, गदेहड़ी, बनजारा, कबर खोदवा, गौरिया समेत घुमंतू और अर्धघुमंतू जातियों को भी उत्तर प्रदेश की अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में शामिल करने की मांग उठाई गई।
नुरुल हुदा ने मुख्यमंत्री द्वारा 39 जातियों के सर्वे में तीन मुस्लिम जातियों को शामिल किए जाने का स्वागत करते हुए समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़े मुस्लिम समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों में उचित स्थान नहीं मिला है।
ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष मतिउल्ला खान, शोहराब आलम, मुबारक अली, हाजी निजामुद्दीन, नबीसरवर, शहबाज, अख्तर, अशरफ, इस्राइल, चांद, एकलाख, नियाज, इमरान, जावेद और मुस्तफा समेत अन्य लोग शामिल रहे।
