एक किताब को 10 बार पढ़ना 10 किताबों को एक-एक बार पढ़ने से बेहतर : IPS चिराग जैन, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, नियमित पुनरावृत्ति और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण पर दिया जोर

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आजमगढ़। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अध्ययन सामग्री की संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्तापूर्ण अध्ययन, बार-बार पुनरावृत्ति और नियमित अभ्यास पर ध्यान देना अधिक प्रभावी है। एक गुणवत्तापूर्ण किताब को 10 बार पढ़ना, 10 अलग-अलग किताबों को एक-एक बार पढ़ने से कहीं बेहतर है। यह बात अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण चिराग जैन (आईपीएस) ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग केंद्र में आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं से कही।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग केंद्र, भीमराव अंबेडकर पुस्तकालय भवन, ब्रह्मस्थान में प्रतियोगी परीक्षार्थियों के मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन के लिए आयोजित कार्यक्रम में आईपीएस चिराग जैन ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने सिविल सेवा समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विद्यार्थियों को व्यावहारिक रणनीतियां बताईं और सफलता के लिए अनुशासन व निरंतरता को महत्वपूर्ण बताया।
आईपीएस चिराग जैन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता केवल अधिक से अधिक किताबें पढ़ लेने से नहीं मिलती। जरूरी है कि अभ्यर्थी सीमित और प्रामाणिक अध्ययन सामग्री का चयन करें तथा उसे बार-बार पढ़कर विषय की मूल अवधारणाओं को मजबूत करें। पढ़ी गई सामग्री की नियमित पुनरावृत्ति से विषय लंबे समय तक याद रहता है और परीक्षा के समय आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ नियमित अभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए। केवल पढ़ने के बजाय प्रश्नों को हल करना, अपनी गलतियों को पहचानना और समय-समय पर आत्ममूल्यांकन करना परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाता है।
आईपीएस चिराग जैन ने पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण को भी तैयारी का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि Previous Year Questions के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा के पैटर्न, प्रश्नों के स्तर और बार-बार पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी मिलती है। प्रश्नों के उत्तर रटने के बजाय उनके पीछे छिपी अवधारणा को समझने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे नए और घुमावदार प्रश्नों को हल करने की क्षमता विकसित होती है।
संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने अध्ययन की रणनीति, समय प्रबंधन, मॉक टेस्ट और उसके मूल्यांकन समेत कई विषयों पर सवाल पूछे। आईपीएस चिराग जैन ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का सरल और व्यावहारिक तरीके से समाधान किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी लंबी प्रक्रिया है, इसलिए अभ्यर्थियों को असफलता या कम अंक आने से निराश होने के बजाय अपनी कमियों का विश्लेषण कर उनमें लगातार सुधार करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, धैर्य और निरंतरता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि नियमित रूप से छोटे-छोटे लक्ष्य तय कर उन्हें पूरा करने की आदत सफलता की राह आसान करती है। समय का सही प्रबंधन और लगातार आत्ममूल्यांकन अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी की वास्तविक स्थिति समझने में मदद करता है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। आईपीएस चिराग जैन के मार्गदर्शन से प्रतियोगी परीक्षार्थियों को अध्ययन की दिशा और रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी मिली। उपस्थित विद्यार्थियों ने उपयोगी मार्गदर्शन के लिए मुख्य अतिथि के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में उन्हें आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।

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